एक वाहन में तो लोहे की कुल्हाड़ी भी फंस गई। जान बचाकर मौके पर से भागे वन कर्मियों ने तड़के चार बजे कोतवाली आकर पुलिस से शिकायत की। बाद में डीएफओ निधि चौहान के नेतृत्व में वन कर्मी जिला मुख्यालय पर एसएसपी डॉ. ब्रजेश कुमार सिंह से मिले। इसे लेकर प्रभारी निरीक्षक प्रवीण कुमार ने बताया कि वन कर्मियों पर हमले की जानकारी मिली है, लेकिन कार्रवाई के लिए उनकी ओर से कोतवाली में तहरीर नहीं दी गई है।
हमले के दौरान मचा फायरिंग का शोर
वन विभाग की टीम कटरी में जहां अपनी भूमि को कब्जामुक्त कराने पहुंची, उस पर पौधारोपण किया जाना है। कब्जे की जानकारी तो विभागीय अफसरों को पहले से थी, लेकिन अफसरों ने कार्रवाई शुरू करने से पहले पुलिस का सहयोग नहीं लिया। वन कर्मियों पर हमले के दौरान ग्रामीणों की ओर से फायरिंग भी किए जाने का शोर मचा। विभाग के कर्मचारी इसे लेकर चुप्पी साधे हुए हैं।
कासगंज जिले में सिकंदरपुर वैश्य, और सोरों कोतवाली क्षेत्र तो बदायूं के गांव हुसैनपुर खेड़ा, पिपरौल और सहसवान के गांव चंदनपुर के लोगों के बीच जंग में हत्याएं भी हो चुकी हैं। सरकारी जमीनों पर जब भी कब्जा कर फसल उगाई जाती है, जिससे हर बार वन विभाग के कर्मचारियों की भूमिका सवाल उठते रहे हैं।
डीएफओ निधि चौहान ने बताया कि गंगा किनारे वन विभाग की भूमि है। उस भूमि पर पौधरोपण किया जाना है। पौधरोपण से पहले निरीक्षण कराया गया तो कब्जे का मामला सामने आया था। टीम भूमि कब्जा मुक्त कराने गई तो हमला कर दिया गया। दो वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कार्रवाई की जा रही है।