दातागंज। अंत्येष्टि में शामिल होने आए गांव के व्यक्ति की रामगंगा में डूबकर मौत हो गई। घटना के दौरान रामगंगा किनारे और हजरतपुर पुल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। डूबने के कुछ देर बाद ही उसके शव को निकाल लिया गया। जब सूचना गांव में पहुंची तो उनके परिवार में कोहराम मच गया। घटना के समय अंत्येष्टि में आए गांव के तमाम लोग मौजूद थे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव का पोस्टमॉर्टम कराया है।
गांव वालों के अनुसार, उसावां थाना क्षेत्र के गांव नगरिया अभय निवासी वीरपाल उर्फ वीरे ने फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली थी। रविवार सुबह गांव के तमाम लोग एकत्र हुए और पुलिस के झंझट से बचने के लिए उन्होंने बिना सूचना दिए ही अंत्येष्टि करने का फैसला लिया। गांव के तमाम लोग अंत्येष्टि में शामिल होने हजरतपुर थाना क्षेत्र में रामगंगा पर हजरतपुर पुल के पास पहुंचे।
इसमें गांव के ही रानू सक्सेना (42 साल) पुत्र सर्वेश सक्सेना भी थे। जब चिता कुछ शांत हुई तो परंपरा के अनुसार अंत्येष्टि में शामिल लोग रामगंगा में स्नान करने चले गए। कुछ अलग हटकर रानू सक्सेना नहाने के लिए रामगंगा में कूदा, वहां पानी ज्यादा गहरा था। वह उसमें डूब गया। साथ आए लोगों ने उसे डूबते देखा तो चीख-पुकार मच गई।
गांव के ही गोताखोरों ने निकाला डूबे व्यक्ति का शव
गांव के ही कुछ युवा गोताखोरों ने तत्काल रामगंगा में छलांग लगा दी। गहरे पानी में करीब आधा घंटा की मशक्कत के बाद उसे ढूंढ निकाला। जबतक पानी से बाहर निकालकर लाया गया, तब तक रानू सक्सेना दम तोड़ चुके थे। घटना के दौरान रामगंगा घाट और हजरतपुर पुल पर लोगों की भीड़ लग गई। किसी ने हजरतपुर पुलिस को भी सूचना दे दी। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने पंचनामा भर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया है। घटना की सूचना जब गांव नगरिया अभय पहुंची तो रानू के परिवार में कोहराम मच गया। परिवार के लोग भी घटनास्थल पर पहुंच गए। बताते हैं कि मृतक रानू सक्सेना के माता-पिता की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। परिवार के अन्य लोगों के साथ ही वह अकेला रहता था।
हमउम्र थे दोनों, मेलजोल भी था
उसावां थाना क्षेत्र के गांव नगरिया अभय निवासी वीरपाल (45 साल) ने गांव में किसी बात पर फंदे पर लटककर जान दे दी थी। बताते हैं कि हम उम्र होने के कारण दोनों में काफी मेल-जाेल था। वीरपाल के आत्महत्या करने के कारण रानू काफी उदास थे।
रामगंमा में डूबे युवक को निकालने के लिए गंगा में कूदने को तैयार गोताखोर। संवाद