-ढाई सौ को बैठाने की जगह, केंद्र बनाया 483 परीक्षार्थियों का
-कुंवरगांव के जवाहरलाल नेहरू इंटर कॉलेज में मैदान पर पर बैठना पड़ेगा बच्चों को
-प्रिंसिपल के इंकार के बाद भी ज्यादा बच्चों का केंद्र बना दिया
शासन ने भले ही यूपी बोर्ड परीक्षा तंबू-कनात लगाकर न कराने के आदेश कर दिए हैं लेकिन जिले के कई केंद्रों पर फर्नीचर और क्लास रूम न होने की वजह से खुले मैदान पर तंबू-कनात लगाकर ही परीक्षा करानी पड़ेगी। परीक्षार्थियों को भी टाट-पट्टी पर बैठाना पड़ेगा। कुछ ऐसी ही स्थिति कुंवरगांव के पंडित जवाहरलाल नेहरू जिला पंचायत इंटर कॉलेज में बन गई है।
इस विद्यालय में सात कमरों में सिर्फ ढाई सौ परीक्षार्थियों को ही बैठाने की व्यवस्था है बावजूद इसके यहां 483 परीक्षार्थियों का केंद्र बना दिया गया है। ऐसे में, ढाई सौ अतिरिक्त परीक्षार्थियों को कहां बैठाकर परीक्षा दिलाई जाए, इसको लेकर केंद्र व्यवस्थापक और शिक्षक परेशान हैं। परीक्षा करानी है इसलिए मजबूरी में विद्यालय के मैदान पर ही टाट-पट्टियों पर परीक्षार्थियों को बैठाना होगा, क्योंकि फर्नीचर का बंदोबस्त भी नहीं है।
इसी प्रकार मैदान पर बच्चे धूप में तो बैठेंगे नहीं इसलिए उनके लिए तंबू-कनात भी लगवानी पड़ेगी। इस संबंध में केंद्र व्यवस्थापक बनाए गए प्रिंसिपल हरिओम सिंह ने इससे पहले ही जिला विद्यालय निरीक्षक को लिखकर दे दिया था कि उनके विद्यालय को ढाई सौ से ज्यादा परीक्षार्थियों का केंद्र न बनाया जाए लेकिन उनकी मांग को अनसुना कर दिया गया। विद्यालय में हाईस्कूल के 448 और इंटर के 35 परीक्षार्थी आवंटित कर दिए गए। यानी 483, इतने परीक्षार्थी एक साथ बैठाना संभव नहीं है। केंद्र व्यवस्थापक का कहना है कि उनके विद्यालय में 250 परीक्षार्थियों को बैठाने भर के लिए ही पर्याप्त फर्नीचर नहीं है, ऐसे में बाकी को कहां बैठाएंगे? मजबूरी में ज्यादा परीक्षार्थियों को विद्यालय के मैदान पर बैठाकर ही परीक्षा दिलानी पड़ेगी।
विद्यालय में बोर्ड भी नहीं लगा
पंडित जवाहरलाल नेहरू जिला पंचायत इंटर कॉलेज पर बोर्ड भी नहीं लगा है, ऐसे में बाहर से आने वाले परीक्षार्थियों को काफी दिक्कत होगी। प्रिंसिपल हरिओम सिंह का कहना है कि पहले विद्यालय के नाम का बोर्ड लगा हुआ था जो पुराना हो गया और बाद में टूट गया। बाद में बजट के अभाव में इसे नहीं लगवाया जा सका।
यूपी बोर्ड के नियम के तहत किसी भी विद्यालय को तीन सौ परीक्षार्थियों से कम का केंद्र नहीं बनाया जा सकता। चूंकि यह विद्यालय लोकेशन और अनुदानित होने की वजह से केंद्र बनाना जरूरी था इसलिए इसको बोर्ड की गाइड लाइन के मुताबिक केंद्र बनाना पड़ा। जहां तक फर्नीचर की बात है तो केंद्र व्यवस्थापक आसपास के किसी वित्तविहीन विद्यालय से भी फर्नीचर हासिल कर सकते हैं। उनको पूरा सहयोग किया जाएगा।
-राकेश कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक