...तो बच जाती मासूम की जान
इस घटना के बाद से पूरे गांव में भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते परिजनों को रेबीज की जानकारी हो जाती और मासूम को एंटी रेबीज का टीका लग जाता तो शायद बच्चे की जान बच सकती थी। इस घटना के बाद परिवार और पड़ोस के लोग सतर्क हो गए हैं।
चिकित्साधीक्षक डॉ. प्रशांत त्यागी ने बताया कि यह घटना इस बात का दुखद उदाहरण है कि कुत्ते के काटने और चाटने से होने वाले रेबीज को हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर किसी को भी कुत्ते, बिल्ली, बंदर काट लें या घाव को चाट लें तो तुरंत रेबीज का टीका लगवाना चाहिए। इसमें अनदेखी जानलेवा हो सकती है।