उझानी। सूर्यदेव मंगलवार को मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इसी के साथ पहला पर्व मकर संक्रांति होगा, जो दान-पुण्य के लिए अहम है। मांगलिक कार्य भी शुरू हो जाएंगे। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान कर विधि के अनुरूप दान करना ज्यादा फलदायक साबित होता है।
ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि सूर्यदेव जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। 14 जनवरी को मकर राशि में सूर्य का प्रवेश सुबह 09:03 बजे होगा। इस दिन गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान के बाद दान का विशेष महत्व है, लेकिन अगर गंगा स्नान करना संभव न हो तो घर पर ही पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान करें। यह भी फलदायक होता है।
मकर संक्रांति के दिन पूजा-अर्चना के बाद उड़द की दाल और चावल का दान करें। साथ ही तिल, चिड़वा, सोना, ऊनी वस्त्र, कंबल आदि दान करने का भी विशेष महत्व है। धार्मिक विधि के अनुरूप दान करने से पुण्य कई गुना अधिक अर्जित होता है। मकर संक्रांति से मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। शादियों के लिए बरातघर भी सजकर तैयार होने लगे हैं।
मकर संक्रांति पर स्नान कर शुभ मुहूर्त में करें दान
ज्योतिषाचार्य राजेश शर्मा ने बताया कि मकर संक्रांति का पुण्यकाल 14 जनवरी को सुबह 09:03 बजे शुरू होगा, जो शाम 05:46 बजे तक रहेगा। महापुण्यकाल इसी दिन सुबह 09:03 बजे से 10:04 बजे तक है। ब्रह्म मुहूर्त तड़के 05:27 बजे 06:21 बजे तक रहेगा। अमृत काल का शुभ मुहूर्त सुबह में 07:55 बजे से 09:29 बजे तक है।
16 जनवरी से आठ जून तक गूंजेगी शहनाई
सूर्यदेव के मकर राशि में प्रवेश के बाद मांगलिक कार्य शुरू होते हैं, विवाह समारोह खास अहमियत रखते हैं। ज्योतिषाचार्य की मानें तो इस वर्ष सात महीने में 90 शुभ मुहूर्त हैं। सबसे अधिक मुहूर्त फरवरी में 20, मई में 19 हैं। सबसे कम चार दिन के मुहूर्त दिसंबर में हैं। बृहस्पति के अस्त होने और चातुर्मास के कारण जून के बाद सीधे नवंबर में विवाह के लिए मुहूर्त निकलेंगे। इसके तहत जनवरी में 16, 17, 18, 19, 20, 21, 22, 23, 24, 25, 26 को शादियां होंगी।
उझानी में सजकर तैयार बरातघर। संवाद