बदायूं। जिला महिला अस्पताल प्रशासन ने अपनी नाकामी छिपाने के लिए समय से पहले ही महिला को डिस्चार्ज कर दिया। इसके बाद महिला अपने पति के साथ चली गई। बता दें कि शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी प्रसूता को सामान्य परिस्थिति में प्रसव के बाद 72 घंटे से पहले डिस्चार्ज न किया जाए। बावजूद इसके प्रसूता को केवल 35 घंटे में ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
सिरसौली गांव निवासी सविता उर्फ सुनीता पत्नी सूरज को 22 दिसंबर की रात प्रसव पीड़ा हुई थी। घरवाले उसे लेकर रात करीब 10:35 बजे जिला महिला अस्पताल पहुंचे थे। सविता को 100 शैय्या महिला अस्पताल में भर्ती किया गया था। आरोप है कि समय पर डॉक्टर और स्टाफ उपलब्ध नहीं हुए। इसी दौरान महिला ने अस्पताल की गैलरी में ही नवजात को जन्म दे दिया।
समय पर चिकित्सकीय सहायता न मिलने के कारण नवजात की मौत हो गई थी। कार्यप्रणाली पर सवाल उठे तो अस्पताल प्रशासन ने अपनी नाकामी छिपाने के उद्देश्य से महिला को जल्दबाजी में 35 घंटे बाद ही डिस्चार्ज कर दिया। महिला मानसिक रूप से आघात में थी और इस स्थिति में उसे अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत थी।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि डिस्चार्ज के कागजों में अस्पताल प्रशासन ने डिस्चार्ज का समय तक दर्ज नहीं किया है। आरोप है कि ऐसा जानबूझकर किया गया, ताकि बाद में कागजी कार्रवाई को मनमाफिक ढंग से पूरा किया जा सके और नियमों के उल्लंघन पर सवाल न उठें। महिला के पति सूरज ने बताया कि वह मजबूरी में अपनी पत्नी को घर ले आया है। क्योंकि अस्पताल प्रशासन ने कोई विकल्प नहीं दिया। उन्होंने कहा कि अभी पत्नी की हालत ठीक नहीं है, लेकिन स्टॉफ नहीं नहीं सुनी।
इस संबंध में जानकारी नहीं है, पता कराते हैं कि समय से पहले महिला को डिस्चार्ज क्यों कर दिया है। -डॉ. शोभा अग्रवाल, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
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निरीक्षण में खुली महिला अस्पताल की पोल, डॉक्टर व स्टाफ मिले नदारद
- सुबह नौ बजे सीएमएस पहुंचीं महिला अस्पताल, मरीज भी देखे
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। जिला महिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर लगातार लापरवाही सामने आई है। बुधवार सुबह करीब नौ बजे जब महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) ने औचक निरीक्षण किया तो डॉक्टरों से लेकर नर्सिंग और अन्य स्टाफ तक ड्यूटी पर मौजूद नहीं मिला। इस दौरान ओपीडी में मरीज बैठे डॉक्टरों का इंतजार करते नजर आए। उन्होंने कुछ मरीजों को देखा और दवाएं लिखीं।
सीएमएस के निरीक्षण के दौरान कई कक्ष खाली मिले। रजिस्ट्रेशन काउंटर पर भी कर्मचारियों की संख्या कम पाई गई। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा, खासकर गर्भवती महिलाओं और दूर-दराज से आई मरीजों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। मरीज ममता ने बताया कि वे सुबह आठ बजे ही अस्पताल आ गई थी। डॉक्टरों के न आने के कारण उनकी जांच नहीं हो सकी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सीएमएस ने खुद कुछ मरीजों की जांच की और उन्हें दवाएं लिखीं। उन्होंने मौके पर मौजूद स्टाफ को निर्देश दिए कि समय से ड्यूटी पर पहुंचना अनिवार्य है।
सवा नौ बजे पहुंचीं महिला डाॅक्टर
जिला महिला अस्पताल में डॉक्टर राबिया सुबह सवा नौ बजे के करीब पहुंचीं, जबकि बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आंकाक्षा सिंह साढ़े नौ बजे के करीब। यही हाल अन्य स्टाफ का रहा, जिससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
निरीक्षण रिपोर्ट तैयार की जा रही है और जो भी कर्मचारी बिना सूचना के अनुपस्थित पाए गए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. शोभा अग्रवाल, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल