हेलमेट होता तो शायद बच जाती जान
बाइक को लोकेश चला रहा था। उमेश और नीरज बैठे थे, लेकिन हेलमेट किसी ने नहीं पहना था। इस लापरवाही ने तीनों की जान ले ली। लोगों का यही कहना था कि युवकों ने हेलमेट पहना होता तो शायद जान नहीं जाती।
दाखिले के लिए निकले थे, घर आई मौत की खबर
नीरज और उमेश इंटर में फेल होने के बाद बुधवार को फिर दाखिला कराने के लिए निकले थे। उनकी मौत की खबर आई तो परिजन बेसुध हो गए। दोनों दो-दो विषयों में फेल हो गए थे। पास के ही रहने वाले लोकेश ने दोनों का दाखिला कराने का जिम्मा लिया था।
सहसवान कोतवाली क्षेत्र के गांव सुखर्रा निवासी नीरज व उमेश का घर आमने-सामने था। पड़ोस में लोकेश रहता था। वह निजी स्कूल चलाता था। गांव के लोग उन्हें गुरुजी कहते थे। नीरज और उमेश कई दिन से दाखिले को लेकर लोकेश से अनुरोध कर रहे थे। बुधवार को उसने बिसौली क्षेत्र के एक इंटर कॉलेज में दाखिला कराने की बात कही थी। सुबह करीब 10 बजे तीनों एक ही बाइक से गए थे। लोकेश ने दोनों का दाखिला कराया। इसके बाद किसी काम से वह उघैती गए। देर शाम हादसे की सूचना घर पहुंची।
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दो भाइयों में था बड़ा लोकेश
लोकेश दो भाई थे, वह बड़ा था। उसने अपना स्कूल खोला और मेहनत करके परिवार का पालन-पोषण करता था। उसकी मौत के बाद परिवार पर संकट आ गया है। पिता मेहनत-मजदूरी करते हैं। छोटा भाई पिता के साथ ही उनका हाथ बंटाता था, लेकिन परिवार चलाने में लोकेश की अहम भूमिका थी। लोकेश 22 साल था और आईटीआई करने के बाद स्कूल खोलकर बच्चों को पढ़ाने लगा था।