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ये है पौधरोपण के विश्व रिकार्ड का सच

Sun, 24 Jul 2016 11:34 PM IST
बदायूं, ब्यूरो
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ये है पौधरोपण के विश्व रिकार्ड का सच - फोटो : अमर उजाला
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रास्तों में ही नहीं वन क्षेत्र में भी सूख रहे हैं पौधे
पौधे लगाने के बाद नहीं हो सकी कोई देखभाल
 जिले में विश्व रिकार्ड बनाने के लिए 11 जुलाई को वृहद पौधरोपण का काम शुरू हुआ था। उस समय जिले के लोगों में उत्साह था कि 6.37 लाख पौधे जिले को हरियाली देंगे और प्रदूषण मुक्त करेंगे। इस अभियान में हर किसी ने पूरा योगदान दिया लेकिन वन विभाग ने जो करतूतें इस अभियान में जोड़ी हैं, उससे अभियान की मंशा का कितना अंश सफल होगा। यह जांच के बाद ही पता लग सकता है। इस अभियान में प्रयोग की गई पौध इस स्तर की नहीं थी कि सरसब्ज होती। वहीं मनरेगा और अन्य मजदूरी पर कराए गए कामों में भी बड़ी खामियां हैं। कादरचौक ब्लाक क्षेत्र के दो प्रधानों ने विश्व रिकार्ड अभियान में लगाए गए पौध रोपण में खामियों को उजागर करते हुए उच्च वनाधिकारियों के अलावा मुख्यमंत्री को भी इस अभियान के घपले की जानकारी दी है और जांच कराकर कार्रवाई किए जाने की मांग की है। 
कादरचौक। वन विभाग द्वारा कराए गए वृक्षारोपण में धरातल पर सैकडों पेड़ नष्ट हो गए हैं। जिसकी शिकायत वन विभाग के उच्चाधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक भेजी गई है। शिकायत में कहा गया है कि उलाई खेड़ा खाम में गड्ढे ट्रेक्टर से खोदे गए और खाइयां जेसीबी मशीन से डाली गईं। बावजूद इसके मजदूरी का भुगतान फर्जी मस्टरोल भरके कराया गया। इसमें मजदूरों की किताबें और बैंक पास बुक ले ली गई थीं। 
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घटियारी खिरिया-वाकरपुर, वोंदरी, वरौरा, मजरा-गंगवरार आदि गांवों के मनरेगा मजदूरों का भुगतान फर्जी तौर पर किया गया है। इस संबंध में जहां गंगवरार के प्रधान राजेश्वर सिंह राजू कश्यप ने जांच कराए जाने की मांग की है, वहीं ककोड़ा गांव के प्रधान अनिल ने भी यह मुद्दा उठाया है। विभाग से सवाल किया है कि उनके गांव क्षेत्र में वन विभाग के गड्ढे बंद पड़े थे। लगभग 200 मजदूरों ने एक दिन में 80 हजार पौधे कैसे लगा दिए। क्षेत्र के लोगों के विरोध के बावजूद 80 प्रतिशत विलायती बबूल के पौधे लगाए गए। सिमरा ककांड़ा, सुंदरायन में अधिकांश सूखे पौधों को ही रोपित कर दिया गया। पौधरोपण के नाम पर सिर्फ लीपापोती ही की गई है। जिसकी जांच कराने की मांग की गई है।
इन वन क्षेत्रों मे गड्ढों की खुदाई के हिसाब से एक लाख, दस हजार, पांच सौ पचास पौधे लगाए गए हैं।  जिनमें ककोड़ा क्षेत्र में अस्सी हजार, उलाई खेड़ा में पंद्रह हजार, पांच सौ, सुंदरायन में आठ हजार, आठ सौ, सिमरा छह हजार, दो सौ पचास पौधे लगाए गए हैं। ककोड़ा के वन में अधिकांश विलायती बबूल ही लगाया गया है। वहीं उलाई खेड़ा के जंगल में पौधरोपण स्थल पर गंगा का पानी भी भर गया है।
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सहसवान। वन क्षेत्र में किया गया पौधरोपण बेकार का साबित हुआ है। यहां पौधे लगाने के बाद कोई देखरेख नहीं की गई। इससे अधिकतर पौधे सूख गए। 
दातागंज। क्षेत्र में पौधरोपण के परिणाम दुखद हैं। गांव देहात और वन क्षेत्र में पौधरोपण में ऐसे पौधे नहीं लगे जो जल्दी विकसित हो सकें। पौध पहले ही सूखी हुई थी। तमाम सूखी जड़ वाले पौधे लगा दिए गए। जो विकसित होने से पहले ही मुरझा गए हैं। ऐसी ही शिकायतें बिल्सी, इस्लामनगर, बिसौली आदि से भी मिल रही हैं। 
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