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Budaun News: सड़क किनारे गड्ढों में कूड़ा डालने को लेकर चालकों व ग्रामीणों में नोकझोंक, हंगामा

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उझानी में पालिका कार्यालय के बाहर खड़े कूड़ा लदे वाहन। संवाद
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उझानी। पटपरागंज के एमआरएफ सेंटर परिसर में रोक के बाद नगर पालिका के चालकों ने छतुइया और अचौरा के पास सड़क किनारे गड्ढों में कूड़ा डालना शुरू किया तो ग्रामीण ने विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों और पालिका के वाहन चालकों के बीच नोकझोंक हो गई। इसके बाद चालकों ने कूड़ा लदे वाहन पालिका गेट के सामने खड़े कर दिए हैं।
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मंगलवार सुबह सफाई के बाद कूड़ा लदे वाहनों छतुइया और अचौरा गांव के पास पहुंचे तो वहां ग्रामीण खड़े थे। ग्रामीणों ने सड़क किनारे गड्ढों में कूड़ा डालने से रोक दिया। कहा कि बारिश के दिनों में सड़ांध फैलने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। संक्रामक बीमारियां पनपने का भी अंदेशा है। ग्रामीणों के विरोध के बीच वाहन चालकों ने उन्हें समझाने की कोशिश की। चालकों ने पालिका के अफसरों को भी मौके से ही फोन करके अवगत करा दिया।
पालिका के वाहन चालकों और ग्रामीणों के बीच नोकझोंक भी हो गई। हंगामा और नोकझोंक के बाद चालकों ने कूड़ा लदे वाहनों को पालिका की ओर लौटा लिया। बाद में सभी वाहनों को पालिका कार्यालय के गेट के सामने सड़क किनारे खड़ा कर दिया। सफाई निरीक्षक हरीश कुमार त्यागी और लेखाकार राजकुमार गुप्ता वाहन चालकों के साथ मौके पर पहुंचे तो भी ग्रामीण नहीं माने।
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पालिका का पटपरागंज गांव के पास एमआरएफ सेंटर है। सेंटर परिसर में ही कूड़ा लदे वाहन खाली किए जाते थे, लेकिन चार महीना पहले कांग्रेसियों ने धरना देनकर कूड़ा डालने पर रोक लगा दी। इसके बाद से पालिका के कूड़ा लदे वाहन आबादी क्षेत्र से दूर सड़क किनारे कूड़ा डाल रहे हैं।


कूड़ा निस्तारण नहीं होने से बढ़ गई है दिक्कत
- नगर पालिका परिषद ने कूड़ा निस्तारण के लिए करीब छह साल पहले पटपरागंज गांव के पास एमआरएफ सेंटर का निर्माण कराया था। कूड़ा निस्तारण को मशीनें भी लगी हुई हैं, लेकिन तकनीकी कारणों से अभी तक चालू नहीं हो पाई हैं। इसी वजह से सेंटर परिसर के डंपिंग ग्राउंड में कूड़े के ढेर काफी ऊंचे हो गए हैं। इसके विपरीत नरऊ के पास भी मिनी एमआरएफ सेंटर बना है। मिनी सेंटर में भी कूड़ा निस्तारण शुरू नहीं हो पाया है। इसी वजह से वाहन चालकों को बार- बार ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
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- पटपरागंज के एमआरएफ सेंटर परिसर में कूड़ा निस्तारण को मशीनें दो महीना पहले चालू कराने की कोशिश की गई थी। नाकाम होने पर कूड़ा निस्तारण के लिए दूसरी संस्था से संपर्क साधा गया है। तब तक कस्बे का कूड़ा कहीं तो डाला जाएगा। ग्रामीणों ने कूड़ा डालने को जिस स्थान पर विरोध किया है, वह आबादी क्षेत्र से काफी दूर है। - हरीश कुमार त्यागी, सफाई निरीक्षक
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