बदायूं। जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज न होने के कारण हर वर्ष सैकड़ों छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे जनपदों का रुख करना पड़ता है। स्थिति यह है कि इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए जमीन की पहचान कर प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया था, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप जिले के युवाओं को पढ़ाई के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
बदायूं में शहर, सहसवान, बिल्सी और अलापुर में राजकीय पॉलिटेक्निक संचालित हैं। जहां से छात्र-छात्राएं डिप्लोमा प्राप्त करते हैं। डिप्लोमा के बाद अधिकांश विद्यार्थी इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करना चाहते हैं, लेकिन जिले में कोई इंजीनियरिंग कॉलेज न होने के कारण उन्हें बरेली, मुरादाबाद, अलीगढ़, नोएडा या लखनऊ जैसे शहरों में जाना पड़ता है। इससे शिक्षा पर खर्च बढ़ जाता है और गरीब व मध्यम वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। छात्र प्रणव सिंह, उमेश शर्मा का कहना है कि यदि जिले में ही इंजीनियरिंग कॉलेज होता तो न केवल उनका समय और पैसा बचता, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और विकास के अवसर भी पैदा होते।
बदायूं राजकीय पॉलिटेक्निक में 32 एकड़ जमीन
-शहर में बिसौली रोड पर स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक में करीब 32 एकड़ जमीन खाली पड़ी है। इस जमीन पर इंजीनियरिंग कॉलेज का फैसला लिया। इसके बाद में 32 में से 17 एकड़ जमीन का चयन किया गया और बाद में शासन को प्रस्ताव भेजा गया था।
वर्जन
इंजीनियरिंग कॉलेज बनाने के लिए जमीन दे दी गई है, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है।
-एसके आजाद, प्रधानाचार्य, जीटीआई