बदायूं। जिले के तीन वेटलैंड को फिर से अस्तित्व में लाया जाएगा। वन विभाग ने कार्य योजना बनानी शुरू कर दी है। चयनित वेटलैंड के लिए जहां से पानी जाएगा, उन रास्तों पर वन विभाग पौधरोपण करेगा। जल्द ही वहां पर पौधरोपण शुरू किया जाएगा। इससे पौधों को भी नियमित पानी मिलता रहेगा।
बदायूं से होकर गंगा और रामगंगा नदी निकलती हैं। वहीं महावा, भैंसोर, सोत और अरिल नदियां भी जिले में हैं। हालांकि गंगा और रामगंगा के कुछ तटवर्ती इलाकों में ही प्रवासी पक्षियों के प्रवास को वेटलैंड बचे हैं। कादरचौक में सैकड़ों एकड़ की नूरपुर झील और सहसवान में सरसोता जलाशय के पास का विस्तृत वेटलैंड सूख चुका है। ऐसे में सर्दियों के मौसम में हजारों मील का सफर तय कर बदायूं पहुंचने वाले प्रवासी पक्षियों की संख्या काफी कम होती जा रही है।
यहां बता दें कि प्रवासी पक्षियों का नवंबर से फरवरी तक जिले के वेटलैंड में प्रवास होता है। इस दौरान वह यहां प्रजनन भी करते हैं। फिलहाल वेटलैंड सूखने का असर जैव विविधता पर हो रहा है। इसको ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने दोबारा से वेटलैंड को लेकर कार्य योजना बनाई है। इसके लिए तीन वेटलैंड का चयन किया है। इसमें सहसवान का सरसोता झील, बिसौली की पिसनहारी झील और समरेर तालाब का चयन किया गया। झील और तालाब में जिस रास्ते से पानी जाता है। उस रास्ते पर पौधे लगाए जाएंगे। हालांकि अभी कौन से पौधे लगाए जाएंगे। इसका चयन नहीं किया गया है।
अब तक तीन वेटलैंड का चयन किया गया है, जहां पौधरोपण किया जाएगा। इससे जहां पौधों को पानी लगाने की जरूरत नहीं होगी। साथ ही पेड़ों की वजह से उनके आसपास पानी का जमाव भी होगा। जो प्रवासी पक्षियों के आकर्षित करेगा। - प्रदीप वर्मा, डीएफओ