बदायूं। 24 जून को कोर्ट में किशोरी के कलम बंद बयान दर्ज होने थे, लेकिन पुलिस ने इसी दिन उसे मेडिकल परीक्षण के लिए भेज दिया। उसने मेडिकल परीक्षण करने वाली डॉक्टर की टीम को बताया कि एसआई ने उसके साथ दुष्कर्म किया है। जब उपनिरीक्षक को यह जानकारी हुई तो वह किशोरी को वन स्टॉप सेंटर में शिफ्ट करवा दिया। इसके बाद उपनिरीक्षक व महिला आरक्षी किशोरी को किसी से भी शिकायत न करने की बात समझाते रहे। इसके चलते उसके चार दिन तक कोर्ट में बयान दर्ज नहीं कराए। पुलिस को लगा कि अब किशोरी उपनिरीक्षक के खिलाफ बयान नहीं देगी तो उसे 28 जून को बयान दर्ज कराने के लिए कोर्ट में लाया गया। कोर्ट में किशोरी ने अपने बयानों में उपनिरीक्षक पर दुष्कर्म के आरोप लगाए है। इसके अलावा उसने परिजनों के साथ जाने की सहमति जताई थी।
मां बोली, बेटी को बेचा गया था
किशोरी की मां ने बताया कि उसकी बेटी को परिवार की ही एक बिहार की रहने वाली महिला का दूसरे समुदाय के लोगों के साथ उठना बैठना है। उसी ने बेटी को बेच दिया था। इस वजह से उसकी बेटी को अगवा किया गया। आरोपी बेटी को बेचने के लिए तमिलनाडु ले गए थे। मां ने बताया कि महिला समेत दो आरोपियों की अभी भी गिरफ्तारी नहीं हुई है।