फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Budaun News: गंगा तट पर बिखरने लगी आस्था और आधुनिकता की छटा

विज्ञापन
ककोड़ा मेले में सुरक्षा के लिए लाए गए पुलिस के घोड़ा। संवाद - फोटो : ramban news
विज्ञापन
कादरचौक। गंगा की पवित्र धारा के किनारे हर साल लगने वाला ऐतिहासिक ककोड़ा मेला इस वर्ष भी पूरे उल्लास के साथ आरंभ हो गया है। मेले के शुरू होते ही कुर्मियान क्षेत्र में रौनक लौट आई है। दूरदराज के जिलों और गांवों से श्रद्धालु, साधु-संत और कल्पवासी परिवार पहुंचने लगे हैं। गंगा तट पर तंबुओं की कतारें सजने लगी हैं। ढोल-नगाड़ों और म्यूजिक सिस्टम की धुनों से वातावरण भक्तिमय और जीवंत हो उठा है।
विज्ञापन

गंगा की तलहटी में बसे तोफी नगला, कुर्मियान और आसपास के गांवों में इन दिनों उत्सव जैसा माहौल है। कल्पवासियों ने अपने परिवारों के साथ यहां पहुंचकर तंबू गाड़ना, जमीन समतल करना और अस्थायी आवास बनाना शुरू कर दिया है। कई श्रद्धालु ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में साजो-सामान लेकर आ रहे हैं तो कुछ स्थानीय लोग प्लॉट ढूंढकर अपने तंबू स्थापित कर रहे हैं।
लगभग 15 दिन तक चलने वाला यह मेला केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन, लोक संस्कृति और सामाजिक मेल-जोल का भी केंद्र है। पहले जहां यह मेला ढोल-मजीरों, आल्हा की तान और भक्ति गीतों की गूंज से सराबोर रहता था, वहीं अब आधुनिकता की चमक ने इसकी ध्वनि बदल दी है।
विज्ञापन


भक्ति से मनोरंजन तक, बदल गया मेले का स्वरूप
अब मेले में डीजे और म्यूजिक सिस्टम की आवाजें पारंपरिक वाद्ययंत्रों की जगह ले चुकी हैं। पहले गांव की महिलाएं गंगा किनारे बैठकर गंगा मैया के गीत गाया करती थीं और श्रद्धालु दूर-दूर से सुनने आते थे, लेकिन अब उनके गीतों की जगह फिल्मी धुनों और फूहड़ गानों की गूंज ने ले ली है। आधुनिकता के इस दौर में मेले की सांस्कृतिक पहचान धीरे-धीरे कमजोर पड़ती जा रही है। फिर भी, ग्रामीणों का एक बड़ा वर्ग आज भी परंपरा से जुड़ा हुआ है। वे अपने तंबुओं में भजन-कीर्तन और गंगा पूजा के आयोजन करते हैं। यह मेला एक तरह से आस्था और आधुनिकता का संगम बन गया है, जहां एक ओर श्रद्धा की लहर बहती है तो दूसरी ओर मनोरंजन की गूंज सुनाई देती है।

सुरक्षा के लिए पहुंचे कोहिनूर और क्रिप्टोनाइट घोड़े
मेले की भीड़ और व्यवस्थाओं को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह सक्रिय है। इस बार भीड़ नियंत्रण के लिए बरेली पुलिस के दो विशेष प्रशिक्षित घोड़े कोहिनूर और क्रिप्टोनाइट तैनात किए गए हैं। ये घोड़े न सिर्फ भीड़भाड़ वाले इलाकों में व्यवस्था बनाए रखने में मदद करेंगे, बल्कि जंगल क्षेत्र में अपराधियों की खोजबीन में भी सक्षम हैं। बरेली से आए ठेकेदार इन घोड़ों के लिए चारा और राशन की आपूर्ति कर रहे हैं।

पूर्वी क्षेत्र में भी कल्पवासियों ने डाले तंबू, स्टेज और पंडाल निर्माण जारी
इस बार मेले में केवल कुर्मियान क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूर्वी परिक्षेत्र में भी कल्पवासियों का जमावड़ा शुरू हो गया है। बरेली, आंवला, फर्रुखाबाद, शाहजहांपुर और पीलीभीत से श्रद्धालु अपने परिवारों के साथ पहुंच रहे हैं। रंगमंच, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए पंडाल और मंचों का निर्माण तेजी से हो रहा है।
गंगा तट पर रोजाना हजारों श्रद्धालु स्नान, पूजा और ध्यान करने पहुंच रहे हैं। मेले में लगने वाले झूले, दुकानों और भोजनालयों ने भी वातावरण को जीवंत बना दिया है। बच्चों में उत्साह और श्रद्धालुओं में भक्ति का रंग घुलने लगा है।


ग्रामीण संस्कृति की झलक के साथ प्रशासनिक सतर्कता भी चरम पर
ककोड़ा मेला न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था का भी बड़ा केंद्र बन गया है। मेला क्षेत्र में व्यापारियों, कारीगरों और ग्रामीण उत्पाद बेचने वालों की चहल-पहल ने इसे एक ग्रामीण उत्सव का स्वरूप दे दिया है। प्रशासन ने सुरक्षा, स्वास्थ्य और यातायात प्रबंधन को लेकर विशेष तैयारी की है। पुलिस बल के साथ जल पुलिस, गोताखोरों और स्वास्थ्य विभाग की टीमों को तैनात किया गया है।

जिला पंचायत अध्यक्ष ने लिया व्यवस्थाओं का जायजा
शुक्रवार को जिला पंचायत अध्यक्ष वर्षा यादव ने ककोड़ा मेले के चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने बेहतर इंतजाम के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया। इस अवसर पर अपर मुख्य अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह, पूर्व एमएलसी जितेंद्र यादव, पूर्व विधायक धर्मेंद्र शाक्य ,अभियंता पवन कुमार गोयल, जेई और कर्मचारी मौजूद रहे।

ककोड़ा मेले में सुरक्षा के लिए लाए गए पुलिस के घोड़ा। संवाद- फोटो : ramban news

ककोड़ा मेले में सुरक्षा के लिए लाए गए पुलिस के घोड़ा। संवाद- फोटो : ramban news

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें