बदायूं। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर निर्माण सामग्रियों पर भी पड़ने लगा है। सरिया, ईंट, टाइल्स, पेंट आदि की कीमतों पर 20 से फीसदी का उछाल आया है। इसके चलते लोगों का मकान बनवाने का बजट खराब हो रहा है और व्यापार भी प्रभावित हो रहा है। व्यापारियों का मानना है कि युद्ध ऐसे ही चलता रहा तो आने वाले दिनों में चीजों के दाम और बढ़ने की आशंका है।
व्यापारियों के मुताबिक, युद्ध के चलते कंपनियों को कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने और परिवहन का भाड़ा बढ़ने से कीमतें बढ़ रही हैं। रेत, बजरी, सीमेंट और बजरफुट के दाम अभी स्थिर हैं। लेकिन, आने वाले दिनों में सीमेंट पर 5 से 10 फीसदी दाम बढ़ जाएंगे। इसके साथ ही ईंट, सरिया, टाइल्स, सरिया और पेंट की कीमतों बढ़ गई हैं।
निर्माण सामग्री बढ़ने के बाद छोटे ठेकेदारों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। ठेकेदार संजीव ने बताया कि इस समय बहुत दिक्कतें आ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में गेहूं की कटाई शुरू होने के बाद मजदूर मिलने मुश्किल हो रहे हैं। जो मजदूर 400 रुपये में मिल जाते थे वह 500 रुपये मिल रहे हैं। ऊपर से इस युद्ध के चलते निर्माण सामग्री पर रुपये बढ़ने के बाद मुश्किलें आ रही हैं। मालिक की ओर से काम जल्दी खत्म करने का दबाव बनाया जा रहा है। ऐसे में इस ठेका में घाटा बढ़ जाएगा। जिससे नए काम लेने में डर बना हुआ है।
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20 से 25 फीसदी बढ़े टाइल्स के दाम
युद्ध के चलते पैदा हुई गैस की किल्लत बीच टाइल्स पर 20 से 25 फीसदी तक दाम बढ़ गए हैं। व्यापारी दिनेश कुमार ने बताया कि कंपनियों की ओर से गैस की किल्लत और केमिकल की आपूर्ति ठीक से न होने पाने के कारण दाम बढ़ाए गए हैं। इसके साथ ही परिवहन भाड़ा बढ़ने का असर इस महंगाई पर पढ़ रहा है। दिनेश ने बताया कि माल मंहगा होने के बाद व्यापार भी प्रभावित हो रहा है। इसी कारण से नया माल मंगाने में भी डर लग रहा है। लोगों की मांग को देखते हुए ऑर्डर लिए जाएंगे। वहीं, सरिया पर भी 500 रुपये क्विंटल पर रुपये बढ़ गए हैं।
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कोयला और लकड़ी के बढ़े दाम
ईंट भट्टा संचालकों के अनुसार, कोयला के दाम काफी बढ़ गए हैं। सामान्य दिनों में 14,000 रुपये प्रति मिलता था, जो अब 24,000 रुपये प्रति टन हो गया है। इसके साथ ही 500 रुपये क्विंटल में मिलने वाली लकड़ी अब 800 से 850 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से मिल रही है। इसके कारण ईंट पर रुपये बढ़ाना मजबूरी हो गई है। पहले पक्की ईंट 6500 रुपये हजार रुपये बेची जा रही थी। वह अब 7000 हजार रुपये प्रति हजार रुपये बिक रही है।
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भट्टा संचालकों की बात
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पिछले कुछ महीनों में कोयले की कीमतों में जिस तरह से उछाल आया है, उसने हमारे व्यापार की कमर तोड़ दी है। पहले जो कोयला 14,000 रुपये प्रति टन मिल जाता था। वह बढ़कर करीब 24,000 रुपये प्रति टन हो गया है। इतनी तेजी से बढ़ती लागत के कारण हमें ग्राहकों को भी महंगा माल देना पड़ रहा है, जिससे बिक्री पर असर पड़ रहा है।
रजनीकांत अग्रवाल, ईंट व्यापारी
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कोयले के दामों में लगातार हो रही वृद्धि से उद्योग और छोटे व्यापार दोनों प्रभावित हो रहे हैं। परिवहन और उत्पादन लागत पहले ही बढ़ी हुई थी, अब कोयले की कीमतों ने स्थिति और गंभीर बना दी है। अगर, यही हाल रहा तो आने वाले समय में कई छोटे व्यापारी कारोबार बंद करने पर मजबूर हो सकते हैं।
राहुल वार्ष्णेय, ईंट व्यापारी
उसैहत रोड पर स्थित ईंट भट्टा। संवाद
उसैहत रोड पर स्थित ईंट भट्टा। संवाद