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Budaun News: मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य पर जिम्मेदारियों और बदलती जीवनशैली का असर

Tue, 07 Apr 2026 12:46 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
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बदायूं। बदलती जीवनशैली, पारिवारिक जिम्मेदारियों और सामाजिक दबाव के चलते महिलाओं में तनाव की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसका असर अब केवल मानसिक ही नहीं, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य पर भी साफ दिखाई देने लगा है। स्थिति यह है कि जिला अस्पताल में संचालित मनकक्ष (काउंसलिंग सेंटर) में रोजाना तीन से चार महिलाएं परामर्श और उपचार के लिए पहुंच रही हैं।
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जिला अस्पताल के मनकक्ष में तैनात क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट के अनुसार, अत्यधिक तनाव की स्थिति में व्यक्ति सबसे पहले ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) की ओर बढ़ता है। इस स्थिति में बार-बार अनचाहे विचार आते हैं और व्यक्ति बेचैनी कम करने के लिए कुछ कार्यों को बार-बार दोहराने लगता है, जैसे अत्यधिक सफाई या बार-बार जांच करना।
यदि समय रहते उपचार न मिले तो यह समस्या चिंता में बदल जाती है, इसमें हर समय डर, घबराहट, ओवरथिंकिंग, चिड़चिड़ापन और नींद न आने जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। इसके साथ ही दिल की धड़कन तेज होना और सांस लेने में परेशानी जैसे शारीरिक लक्षण भी सामने आते हैं। इसके बाद स्थिति साइकोसोमेटिक डिसऑर्डर तक पहुंच सकती है, जहां मानसिक तनाव शरीर में वास्तविक बीमारियों के रूप में दिखाई देने लगता है, जैसे सिरदर्द, पेट दर्द और लगातार थकान।
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उपेक्षा से टूटी हिम्मत
सिविल लाइन निवासी मधु सिंह ने बताया कि उनके पति प्राइवेट नौकरी करते हैं और घर में सास व बेटी के साथ रहते हैं। पति के पास परिवार के अन्य सदस्यों के लिए समय होता है, लेकिन उनके लिए नहीं। इस उपेक्षा के कारण वे मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गईं और तीन बार आत्महत्या का प्रयास भी कर चुकी हैं। फिलहाल उनका इलाज चल रहा है।

-तनाव में असामान्य व्यवहार
आवास विकास की रहने वाली रोशनी ने बताया कि घर में झगड़े के बाद उन्हें अत्यधिक बेचैनी होने लगती है और बार-बार नहाने का मन करता है। एक रात में चार बार नहाने के बाद ही उन्हें राहत मिली। यह व्यवहार ओसीडी जैसे लक्षणों की ओर इशारा करता है।

क्या कहती हैं विशेषज्ञ
-महिलाओं में बढ़ता तनाव अब गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। लगातार मानसिक दबाव से शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं। जिससे ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और थायरॉयड जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। कई महिलाएं अपनी परेशानियों को दबाकर रखती हैं। जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। समय पर काउंसलिंग, परिवार का सहयोग और संतुलित दिनचर्या अपनाने से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। कई बार आत्महत्या तक की नौबत आ जाती है।
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-डॉ. सर्वेश कुमारी, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, जिला अस्पताल
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क्या करें
रोजाना कम से कम 30 मिनट योग या व्यायाम करें।
7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद लें।
अपने मन की बात परिवार या दोस्तों से साझा करें।
संतुलित और पौष्टिक आहार लें।
दिनचर्या को व्यवस्थित रखें।
समय-समय पर ब्रेक लेकर खुद के लिए समय निकालें।
सकारात्मक सोच विकसित करें।
जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या काउंसलर से मिलें।
सामाजिक गतिविधियों में भाग लें, खुद को अकेला न रखें।
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क्या न करें
तनाव को लंबे समय तक नजरअंदाज न करें।
छोटी-छोटी बातों को दिल पर न लें।
नींद की अनदेखी न करें।
जंक फूड और अत्यधिक कैफीन से बचें।
अपनी भावनाओं को दबाकर न रखें।
खुद की तुलना दूसरों से न करें।
हर काम अकेले करने की कोशिश न करें।
मोबाइल और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग न करें।
नकारात्मक सोच और अकेलेपन से दूर रहें।
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