सुबह से ही लग जाते हैं लाइन में, करते हैं खरीदारी
क्षेत्र के नेता गांव में इन दिनों प्रसिद्ध देवी मंदिर पर चल रहे मेले में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग सुबह से ही मां के दर्शनों के लिए लाइन में लग जाते हैं। इसके उपरांत पूरे परिवार के साथ मेले का लुत्फ उठाते हैं। दूरदराज से पहुंचने वाले ग्रामीण मेले से सामान भी खरीदते हैं। वहीं मीना बाजार भी गुलजार है। बच्चों का मुंडन संस्कार कराया जा रहा है। पशु नखासा के अलावा खेती से संबंधित उपकरणों की बिक्री भी हो रही है । बच्चे झूला झूलकर और तरह-तरह के व्यंजनों का आनंद ले रहे हैं।
मेले के आयोजन को लेकर कहा जाता है कि यह इलाका कभी राजा रोहिला का राज्य हुआ करता था। एक दिन रानी नेतकुंवरी की डोली आ रही थी। इनकी भी अलीगढ़ के आसपास रियासत थी। उस दौरान राजा रोहिला अपने रथ पर जा रहे थे। रास्ते में उन्हे देखकर वह उनकी सुंदरता पर मोहित हो गए और उनसे प्रेम अनुरोध किया। उनका प्रस्ताव रानी ने अस्वीकार कर दिया। इससे राजा क्रोधित हो गया और विवाद ने जन्म ले लिया। इसके बाद रानी की सेना और उनकी सेना में युद्ध हुआ। रानी सेना संख्या बल में कम होने के कारण पराजित हो गई। रानी ने भी पूरी वीरता से युद्ध में भाग लिया और वीरगति को प्राप्त हुईं। ऐसी मान्यता है कि रानी वहीं जमीन में समां गईं। इसके बाद से यहां मेले का आयोजन किया जाता है। कुछ दूर पर नेता गांव का आश्रम था, जहां साल में तीन बार ज्येष्ठ पूर्णिमा, चैत्र और कुवार माह में मेला लगता है। बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। लोगों का कहना है कि यहां दर्शन करने वालों की मनोकामना पूरी होती है।