करीब 6.84 करोड़ से बना बांध एक साल में ही जर्जर हुआ
एक साल में ही जर्जर हो चुका नवादा मधुकर बांध अब रामगंगा के प्रवाह को झेल पाने लायक नहीं बचा है। बाढ़ से पहले अगर बांध की मरम्मत नहीं हुई तो नवादा मधुकर गांव के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा हो जाएगा। दो साल पहले रामगंगा में कटान की वजह से आधा गांव पहले ही रामगंगा में समा चुका है। गांव वाले काफी परेशान हैं। वे बाढ़ से पहले बांध की मरम्मत कराने की मांग कर रहे हैं।
बाढ़ के दिनों में रामगंगा कई बार रौद्र रूप दिखा चुकी हैं। नवादा मधुकर गांव में करीब तीन साल से कटान हो रहा है। करीब तीन किलोमीटर कटान हो चुका है। रामगंगा कटान करते हुए नवादा मधुकर गांव तक पहुंच गई। दो साल पहले आधे गांव को रामगंगा ने निगल लिया था। इसके बाद गांव के अस्तित्व को बचाने के लिए तत्कालीन प्रधान अशोक सिंह तोमर ने भाग-दौड़ कर गांव में बांध निर्माण को स्वीकृति दिलाई। पिछले साल करीब 6.84 करोड़ रुपये की लागत से नवादा मधुकर बांध बनकर तैयार हो गया।
गौर करने वाली बात यह है कि एक साल में ही बांध जर्जर हो गया है। मिट्टी के पैकेट फट गए हैं। रामगंगा के कटान को रोकने के लिए लगाए गए सीमेंट के पिलर और बल्लियां भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। जर्जर हो चुका बांध अब रामगंगा के बहाव को रोकने में सक्षम नहीं रह गया है। ऐसे में नवादा मधुकर गांव के अस्तित्व पर संकट आ सकता है। लोगों की शिकायत पर डीएम अनिता श्रीवास्तव ने इस संबंध में बाढ़ खंड को निर्देश दिए हैं।
गांव के पूर्व प्रधान के बेटे कौशल सिंह तोमर ने उच्च अधिकारियों से बाढ़ से पहले बांध की मरम्मत की मांग की है।