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Budaun News: रामगंगा किनारे किया गया दंपती का अंतिम संस्कार, तीर्थ स्थल पर संग रहने की थी आखिरी इच्छा

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अगरपाल।
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दातागंज। हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर मार्ग में हुए हादसे में दातागंज कोतवाली क्षेत्र के गांव उरैना पुख्ता के बुजुर्ग दंपती की जान चली गई थी। सोमवार सुबह चार बजे उनके शव एंबुलेंस से गांव लाए गए। परिजनों ने दोपहर को रामगंगा किनारे अंतिम संस्कार किया। दंपती के चिता को मुखाग्नि उनके बड़े बेटे महाराम ने दी।
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कोतवाली क्षेत्र के गांव उरैना पुख्ता निवासी रामभरोसे (65) व उनकी पत्नी शांति (60) शनिवार सुबह हरिद्वार के मनसा देवी दर्शन के लिए गए थे। उनके साथ गांव उरैना पुख्ता के अलावा आनंदापुर और गोटिया के करीब 25 लोग भी गए थे। वहां पहुंचने के बाद दंपती व गांव के लोग मनसा देवी के दर्शन के लिए मंदिर मार्ग पर चल रहे थे। इसी बीच किसी ने करंट उतरने की अफवाह फैला दी। इससे श्रद्धालुओं में भगदड़ मच गई। उसमें श्रद्धालुओं के नीचे दबने से दंपती रामभरोसे व उनकी पत्नी शांति की मौत हो गई।
वहीं, आनंदापुर के भूपेंद्र व उनके चाचा छन्ने घायल हो गए। इसके अलावा उरैना पुख्ता के अगरपाल, सुमित, चंद्रपाल व हरप्यारी मामूली चोटिल हुए है। सोमवार सुबह अलग-अलग एंबुलेंस से दंपती के शव गांव लाए गए। परिजनों में चीख पुकार मच गई। परिजनों ने दंपती के शव का राम किनारे अंतिम संस्कार किया है। शांति देवी की देवरानी मुन्नीदेवी ने बताया कि उनके जेठ रामभरोसे व जेठानी धार्मिक थे। उनकी आखिरी इच्छा घर परिवार छोड़कर तीर्थस्थल पर रहकर भगवान का पूजा पाठ करने की थी।
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बेटे-बहु नहीं करा पाएंगे तीर्थ, हमें खुद की जाना होगा
देवरानी मुन्नी देवी से शांति ने शनिवार को कहा था कि चलो मनसा देवी के तीर्थ करा लाए। हमने उनसे कहा दीदी तुम तीर्थ करके जाओ। हम नहीं जा पाएंगे, तो वह हाथ जोड़कर मुझसे प्रणाम करके गई। बोली थी कि हम दोनों लोगों तीर्थ करने जा रहे है। बहु बेटा तीर्थनहीं करा पाएंगे, इसलिए हम दोनों जाकर कर लेंगे।

दुकान को फांदकर बचाई जान

अगरपाल ने बताया हम सब मनसा देवी के दर्शन करने साथ गए थे। रविवार सुबह गंगा स्नान किया। उसके बाद सीढ़ियों की चढ़ाई कर रहे थे। सामने से जल चढ़ाकर लोगों की भीड़ नीचे आ रही थी। तभी भगदड़ मच गई। हम उसी लाइन में थे। मगर एक साइड में थे। उनसे आगे सीढ़ियों के ऊपर रामभरोसे, उनकी पत्नी शांति, भूपेंद्र व छन्ने थे। उन्होंने एक दुकान को फांदकर अपनी जान बचाई।
ऐसा लगा जैसे तूफान आ गया हो

छन्नेलाल ने बताया सुबह नहाकर वह लोगों के साथ प्रसाद चढ़ाने जा रहे थे। वह कतार में चल रहे थे। अचानक भगदड़ मच गई। हमारे ऊपर भी पता नहीं कितने लोग गिरे। भतीजे को ज्यादा चोट आई। अचानक ऐसी भगदड़ मची थी। जैसे कोई तूफान आ गया हो। उन्होंने भतीजे को अपनी टांगों के नीचे दबा लिया था। इसके बावजूद उसके ऊपर कई लोग दौ़ड़ते हुए चले गए। उन्होंने सीढ़ियों की दीवार से खुद को सटाकर बैठा लिया। इससे उनकी जान बच सकी।


पहले उठा लेकिन फिर गिरकर भीड़ के नीचे दब गया

हादसे में घायल हुए भूपेंद्र (16) ने बताया कि हमारे साथ के सभी लोग दब गए थे। मैं तो एक बार निकल आया था, लेकिन फिर से गिरकर चाचा छन्ने के पास पहुंच गया। मेरे हाथ पैरों में बहुत चोट लगी है। भीड़ शरीर पर कूदते हुए दौड़ रही थी। बचाओ-बचाओ की चीख पुकार मच रही थी। भीड़ के नीचे दबने से उसकी कमर में काफी चोट लगी है।

हमे तो दरोगा ने बताया कि दंपती की चली गई जान

हरप्यारी ने बताया कि हम सब तो तीर्थ करने गए थे। अचानक भगदड़ मच गई। पता नहीं कितने लोग दब गए। हमे तो दरोगा का फोन आया था, तब पता चला कि रामभरोसे और उनकी पत्नी शांति की जान चली गई है। हम तो बहुत नीचे थे। इससे हमारी जान बच सकी।

अगरपाल।

अगरपाल।

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