सहसवान। बाढ़ के तेज बहाव में प्राचीन शिव मंदिर मंगलवार सुबह 10 बजे गंगा में समा गया। लोगों की आंखों के सामने कटान शुरू हुआ। देखते-देखते मंदिर पानी के साथ बह गया। इसका लोगों ने वीडियो भी बना लिया। अब सहसवान क्षेत्र के छह गांव के लोगों को कटान का डर सता रहा है।
सहसवान क्षेत्र में किसी समय आसे नगला भी आबाद हुआ करता था, लेकिन बाढ़ ने गांव को कई साल पहले तहस-नहस कर दिया था। प्रशासन की मदद से गांव को ऊंचे स्थान पर आबाद कर दिया गया था। कुछ समय बाद यहां आगरा से एक संत आ गए और उन्होंने गंगा के किनारे एक मंदिर का निर्माण कराया।
उन्होंने मंदिर में शिव पार्वती, शनिदेव समेत कई देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित कराईं थीं। आसपास गांवों के लोगों में मंदिर के प्रति आस्था बढ़ती गई। सैकड़ों की संख्या में लोग पूजा-अर्चना करने आने लगे। मंगलवार की सुबह भी लोग मंदिर में पूजा करने पहुंचे। देखा कि गंगा का पानी तेजी से कटान करता हुआ मंदिर की ओर बढ़ रहा है।
ग्रामीणों ने पूजा नहीं की। वह बाढ़ से हो रहे कटान को देखने लगे। देखते ही देखते मंदिर बाढ़ के पानी में समा गया। लोगों ने कटान से लेकर मंदिर गिरने तक का वीडियो बना लिया। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। कटान को देखकर आसपास के गांवों के लोग भी दहशत में आ गए हैं।
समाजसेवी तिलक सिंह ने बताया कि बाढ़ का पानी जब घटता है तो कटान शुरू हो ही जाता है। कहा, पानी की तेज धार जिस तरफ मुड़ जाती है उस तरफ सब कुछ वीरान हो जाता है। अब सहसवान क्षेत्र के छह गांव के लोगों को कटान का डर सता रहा है।
किसानों की उम्मीदें बहा ले गई बाढ़, हुए कर्जदार
- अब तो किसान सरकार से ही लगाए हैं मदद की आस
- दातागंज क्षेत्र के नगरिया खनू, सिमरिया, नवादा बदन सहित 20 से ज्यादा गांवों में 15 दिन से भरा है पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। रामगंगा में बढ़े जलस्तर का भारी नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है। सैकड़ों बीघा फसल डूब जाने से किसानों के सपनों में पानी फिर गया है। वह कर्जदार हो गए हैं। इससे किसान परेशान हैं। अब तो किसान सरकार से ही मदद की आस लगाए बैठे हैं।
दातागंज क्षेत्र के नगरिया खनू, सिमरिया, नवादा बदन सहित 20 से ज्यादा गांवों में पिछले 15 दिन से पानी भरा हुआ है। हाल यह है कि किसान अपने खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। कुंडरा मजरा के प्रधान तपन सिंह ने बताया कि एक दर्जन से अधिक लोगों के घरों में शादियां व अन्य कार्यक्रम हैं। इस बार की खेती से उन्हें बड़े अरमान की उम्मीद थी कि अच्छा मुनाफा होगा और ठीक से कार्यक्रम निपट जाएगा, लेकिन बाढ़ के पानी ने सभी की उम्मीदों को बहा दिया है।
-किसानों ने बताई अपनी-अपनी व्यथा-
बाढ़ के पानी में मेरी 20 बीघा फसल डूबी हुई है। इसमें धान और बाजरा किया था। इस बार सोचा था कि अच्छी फसल हो जाएगी तो बैंक का कर्जा अदा कर देंगे, लेकिन बाढ़ ने सपनों में पानी फेर दिया। -बृजपाल राठौर, पूर्व प्रधार, कुंडरा मजरा
रिश्तेदारों से रुपये उधार लेकर पांच बीघा में तिल और 10 बीघा में धान बोया था। शुरुआत से ही उम्मीद थी कि इस बार अच्छा मुनाफा होगा, लेकिन बाढ़ के पानी ने सब बर्बाद कर दिया। अब 40 हजार से ज्यादा का कर्ज हो गया है। -संजीव कुमार, नवादा बदन
आठ बीघा खेत में धान और पांच बीघा खेत में बाजरा की फसल बोई थी। रातभर जागकर पशुओं से फसल को बचाया भी था। बाढ़ के पानी ने सब बर्बाद कर दिया। अब कर्जा कैसे चुकेगा, इसकी चिंता हो रही है। - सूरज पाल, गढि़या
हमारे परिवार की 200 बीघा फसल है। खेत में धान और बाजरा बोया था, रामगंगा के पानी से पूरी फसल डूब गई है। इससे एक लाख रुपये का नुकसान हुआ है। - अरुण कुमार सिंह, नगरिया खनू
खेत व घर कटने के डर से उड़ी लोगों की नींद
बदायूं। जिले के करीब 50 गांवों में बाढ़ का पानी भर गया है। जलस्तर कम होने के बाद से गंगा व रामगंगा में कटान तेजी से होने लगा है। सहसवान के गांव भमरौलिया, तौफिया नगला, वीरसहाय नगला आदि गांवों के लोग तटबंध पर आज भी पन्नियां तानकर रह रहे हैं। इसी तरह उसहैत के गांव जटा समेत चार गांवों के लोगों को कटान का डर सता रहा है। लोग रात को सो भी नहीं पा रहे हैं। यही हाल दातागंज क्षेत्र के करीब 40 गांवों का भी है। यहां भी कटान होने से लोग दहशत में हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी कम होने से कई ग्रामीण बुखार, खासी, आंखों में जलन जैसी बीमारियों से ग्रसित हैं। सहसवान क्षेत्र में स्वास्थ्य टीमों ने शिविर लगाए हैं, जबकि दातागंज में टीमें नहीं जा रहीं हैं, जिससे लोग बीमारी का इलाज भी नहीं करा पा रहे हैं। संवाद
डीएम ने किया बाढ़ से हो कटान क्षेत्र का निरीक्षण
तहसील सहसवान के अंतर्गत बाढ़ प्रभावित टप्पा जमुनी क्षेत्र का स्थल निरीक्षण डीएम अवनीश राय ने मंगलवार को किया। इस दौरान प्रभावित ग्रामीणों से बात की और उनकी समस्याओं को जाना तथा त्वरित समाधान कि लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह से मंदिर कटान की चपेट में आकर पानी में समा गया, उस तरह किसी का मकान चपेट में न आ आए, ऐसे प्रयास करें। उन्होंने इसके लिए तहसील प्रशासन व बाढ़ खंड के अधिकारियों से निगाह रखने को कहा।
बाढ़ के पानी के कटान से पानी में समाया मंदिर, मौके पर पड़े अवशेष। संवाद
बाढ़ के पानी के कटान से पानी में समाया मंदिर, मौके पर पड़े अवशेष। संवाद
बाढ़ के पानी के कटान से पानी में समाया मंदिर, मौके पर पड़े अवशेष। संवाद
बाढ़ के पानी के कटान से पानी में समाया मंदिर, मौके पर पड़े अवशेष। संवाद
बाढ़ के पानी के कटान से पानी में समाया मंदिर, मौके पर पड़े अवशेष। संवाद
बाढ़ के पानी के कटान से पानी में समाया मंदिर, मौके पर पड़े अवशेष। संवाद
बाढ़ के पानी के कटान से पानी में समाया मंदिर, मौके पर पड़े अवशेष। संवाद
बाढ़ के पानी के कटान से पानी में समाया मंदिर, मौके पर पड़े अवशेष। संवाद