एक साल पहले ही जिला योजना की बैठक आयोजित कर भले ही जिला योजना के लिए पर्याप्त समय ले लिया गया लेकिन धनाभाव के कारण प्रस्तावित विकास नहीं हो सके। जिला योजना में विकास कार्यों को तीन अरब, 88 करोड़, 57 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे लेकिन शासन ने इसके लिए मात्र 23 करोड़, 68 लाख, 18 हजार रुपये ही दिए। जो कुल प्रस्ताव के छह प्रतिशत मात्र है। यानि 94 प्रतिशत धन नहीं मिला। इससे आंकलन किया जा सकता है कि जिले में जिला योजना से कितना विकास हो सका।
यहां बता दें कि मौजूदा वर्ष 2015-16 की जिला योजना की बैठक दिसंबर 2014 में ही कर ली गई थी। दो वर्षों की एक साथ बैठक हुई। यानि मौजूदा वर्ष की अग्रिम रूप से बैठक कर ली गई थी। इससे जिला योजना का पूरा समय मिला। वर्ष 2016-17 के लिए जिला योजना की बैठक अप्रैल में होने की संभावना है। हालांकि जिला योजना की बैठक अगले वर्ष के लिए पिछले वर्ष के माह मार्च में हो जानी चाहिए थी।
धनराशि मिलने की स्थिति पर गौर करें तो जिला योजना के नाम पर जिले को विकास का झुनझुना ही थमाया गया। भले ही अन्य कारणों से जिले को काफी धनराशि मिल गई है लेकिन जिले के विकास के नाम पर चल रही जिला योजना की बैठक में जब प्रस्ताव रखे जाते हैं तो इसमें सभी प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
-----
जिला योजना की बैठक की कवायद शुरू
वर्ष 2015-16 वर्ष मार्च में खत्म हो गई। जितना धन जिला योजना को मिलना था, मिल गया। कम धन मिला, इसलिए इतने धन का सदुपयोग भी जल्दी कर लिया गया। अब अप्रैल में जिला योजना की बैठक को गत वर्ष की जिला योजना और शासन द्वारा निर्धारित मदों पर व्यय के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
-----
मार्च में चुनाव का हवाला देकर नहीं की जिला योजना की बैठक
मार्च में खाते बंद करने से पूर्व जिला योजना की बैठक हो जाना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस संबंध में बताया गया कि पंचायत और स्थानिक चुनावों के कारण मार्च में जिला योजना की बैठक नहीं हो सकी। इसलिए अब अप्रैल में इसके लिए तैयारी हो रही है।
-----
जिला योजना में जो राशि मिली है। उस राशि से होने वाले विकास कार्यों पर व्यय का ब्योरा अभी तक हमारे पास आ रहे हैं। सभी को कंपाइल करने के बाद ही पता लग सकेगा कि मिली हुई धनराशि में से विभागों ने कितना व्यय कर दिया है।
- करमजीत सिंह, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी