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Budaun News: टीचर्स कॉलोनी जर्जर, खतरे में शिक्षक व कर्मचारियों की जान

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टीचर्स कॉलोनी में छूटकर गिर रहा प्लास्टर। संवाद
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बदायूं। जिला अस्पताल के सामने बनी टीचर्स कॉलोनी अब शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के लिए समस्या बनने लगी है। यहां रह रहे माध्यमिक शिक्षा विभाग के कई शिक्षक व कर्मचारी अपने परिवारों के साथ ऐसे मकानों में रह रहे हैं जिनकी हालत किसी खंडहर से कम नहीं।
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करीब आधे शतक पुराने इन भवनों के प्लास्टर आए दिन टूटकर गिरते रहते हैं। दीवारों में गहरी सीलन समाई है। फर्श उबड़-खाबड़ हो चुका है। बरसात के मौसम में तो कई मकान पानी टपकने से और भी खतरनाक हो जाते हैं। यहां रहने वालों को हर समय इस बात का डर लगा रहता है कि कहीं पुरानी छत का कोई हिस्सा गिर न जाए।
कॉलोनी में कुल 23 आवास हैं। इनमें से कुछ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को और बाकी तृतीय-द्वितीय श्रेणी कर्मचारियों को आवंटित हैं। कई मकानों में परिवार बच्चों समेत रहते हैं, जिस कारण खतरा और बढ़ जाता है।
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मेंटीनेंस की कटौती, पर मरम्मत शून्य
कर्मचारियों का कहना है कि कॉलोनी में रहने पर उनसे हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) नहीं दिया जाता, उल्टा वेतन से मेंटीनेंस चार्ज भी काट लिया जाता है। बावजूद इसके वर्षों से भवन में किसी प्रकार की कोई मरम्मत नहीं हुई। मरम्मत न होने से परेशान कर्मचारी छज्जे, दरारें और पेंट खुद ही अपने स्तर पर ठीक करवाते हैं, पर कुछ ही महीनों में सीलन फिर से उभर आती है और मकान दोबारा खराब हो जाते हैं। बिजली का बिल भी हर परिवार को अपने मीटर के अनुसार ही देना पड़ता है।

अभी इन आवास की मरम्मत को लेकर कोई धनराशि नहीं आई है। जब भी धनराशि मरम्मत के लिए मिलेगी तो आवासों को सही कराया जाएगा।
-गुलनवाज आलम, प्रभारी जिला विद्यालय निरीक्षक

टीचर्स कॉलोनी में छूटकर गिर रहा प्लास्टर। संवाद

टीचर्स कॉलोनी में छूटकर गिर रहा प्लास्टर। संवाद

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