कछला घाट पर गंगा में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
बदायूं। भागीरथी घाट के दोनों ओर अमावस्या पर्व पर दूसरे दिन भी लोगों ने पुण्य की डुबकी लगाई। इस बार अमावस्या का स्नान दो दिन का माना गया। दूसरे दिन सुबह से ही गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। इस मौके पर हजारों लोगों ने गंगा स्नान कर पूजा-पाठ किया और प्रसाद चढ़ाकर परिवार के लिए मंगल कामना की। स्नान के साथ भगवान सूर्य को अर्घ्य देना, पूजा-पाठ करने के साथ अनुष्ठान भी चलते रहे। भगत बजवाने की भी परंपरा जारी रही। पुण्य लाभ के लिए श्रद्धालुओं ने गंगा घाट पर साधु-संतों को भोजन कराया और दान दिया।
गंगा का एक किनारा बदायूं तो दूसरा कासगंज में है। दोनों ओर स्नानार्थियों में गंगा में डुबकी लगाई और मनोरथ पूरा होने के लिए मां गंगा से याचना की। कासगंज के किनारे पर आगरा, अलीगढ़, एटा, राजस्थान व कासगंज से आने वाले श्रद्धालुओं ने स्नान किया। वहीं बदायूं की ओर के घाट पर बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर आदि जिले के श्रद्धालुओं ने स्नान किया। कुछ श्रद्धालुओं ने गंगाघाट पर ही भंडारा भी कराया। इस बार सोमवार व मंगलवार दोनों दिन अमावस्या मानी गई। इसलिए भीड़ भी दोनों दिन रही। गंगा किनारे लगे मेले में भी रौनक रही।
दूसरे दिन दिखाई दीं प्रशासनिक व्यवस्थाएं
कछला। पहले दिन अमावस्या स्नान के दिन प्रशासनिक व्यवस्थाएं नहीं थी। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद दूसरे दिन के स्नान पर्व पर प्रशासनिक इंतजाम किए गए। जगह-जगह पर पुलिस की तैनाती की गई। फायर-ब्रिगेड, नाव एवं गोताखोर भी लगाए गए थे। प्रशासन ने सोमवार की जगह मंगलवार को ही अमावस्या का स्नान पर्व माना। इसलिए सोमवार के दिन स्नान पर्व पर प्रशासन ने यहां कोई व्यवस्था नहीं की थी।
राजस्थान के श्रद्धालुओं ने अपने देवी-देवताओं को भी कराया गंगा स्नान
राजस्थान के श्रद्धालुओं की कछला गंगा घाट पर विशेष आस्था है। हर वर्ष की भांति राजस्थान के श्रद्धालु जब गंगा स्नान को आए तो अपने साथ घर में स्थापित देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को भी साथ लेकर आते हैं। उनके पास प्रतिमाएं पत्थर और धातु की थीं। यहां उन्होंने मान्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को भी गंगा स्नान कराया।