टूर्नामेंट के शुभारंभ के मौके पर प्रधानाचार्य डॉ.श्यामेश ने हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को याद करते हुए बच्चों से कहा कि खेलों को पढ़ाई के बराबर मानकर इन्हें अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। भारत को वापस ध्यानचंद युग में ले जाएं। बोले-दादा ध्यानचंद जिस समय मैदान में उतरते थे उस वक्त विपक्षी टीम के खिलाड़ी चिंता के सागर में डूब जाते थे। सोचने थे कि वह किस तरह ध्यानचंद का मुकाबला करें। ने प्रबंध निदेशक शरद बंसल ने कहा कि भारत को खेल के क्षेत्र में अभी उत्कृष्ट प्रतिभाओं की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वैसे हमारे देश में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है जरुरत हैं उन्हें सामने लाकर मौका देने की। खेल विभाग के प्रमुख नकी अहमद ने कहा कि बच्चो में स्फूर्ति एवं स्टेमिना बनाए रखने में खेलों की महती भूमिका है। दादा ध्यानचंद के कदमों पर चल बच्चे कल के भारत की सुदृढ़ नींव रखेंगे।
प्रतियोगिता में बालकों की रिग हाउस की टीम विजेता रही जबकि साम हाउस उपविजेता रहा। विजेता टीम में आयूष तोमर, अंशु पटेल, मयंक बघेल, पार्थ यदुवंशी, ऋषभ गुप्ता थे। बालिकाओं की टीम में अथर्व हाउस की टीम विजेता रही। साम हाउस उपविजेता रहा। विजेता टीम में अर्पिता पटेल, वेदिका सक्सेना, काव्या सिंह, गर्विता ग्रोवर, जिज्ञा माहेश्वरी थी। प्रतियोगिता को सफल बनाने में शीर्षा, राहुल आर्या, कुलदीप साहू, विपिन सक्सेना का सहयोग रहा।