बदायूं। एएनएम से 17 हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथों पकड़े गए सुनील सक्सेना को विजिलेंस ने जेल भेज दिया है। वह चार महीने से सीएमओ कार्यालय में वेतन जारी करने के पटल पर काम कर रहा थे। उसकी मूल तैनाती कादरचौक में डॉर्क रूम सहायक के पद पर है। वह किसके आदेश से दफ्तर में काम कर रहे थे, सीएमओ डॉ. रामेश्वर मिश्रा ने इस संबंध में अनभिज्ञता जताई है। फिलहाल पकड़े जाने के बाद उन्होंने इसकी सूचना डीजी हेल्थ को भेज दी। बताया कि जल्द ही उसे निलंबित कर दिया जाएगा।
जगत पीएचसी में तैनात पीड़ित एएनएम अंशु को मृतक आश्रित कोटे से कुछ महीने पहले ही नौकरी मिली थी। उनकी मां गुड्डी देवी एएनएम थी और करीब दो साल पहले मौत हुई थी। उनकी मौत के समय अंशु की उम्र 18 वर्ष नहीं थी। कुछ महीने पहले उम्र पूरी हुई तो उनको नौकरी मिली और जगत पीएचसी में तैनात हैं। उनके पिता अशोक कुमार सिंह सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के गांव मचलई में प्रधान रह चुके हैं। वहीं, बड़ी बहन एमबीबीएस करने के बाद जिले की सरकारी अस्पताल में तैनात है। अंशु को नौकरी मिलने के बाद वेतन जारी करने के लिए सीएचओ कार्यालय के लिपिक चार महीने तक चक्कर लगवाते रहे। फिर रुपये मांगने लगे तो उसने इसकी शिकायत विजिलेंस से की और बृहस्पतिवार को सुनील सक्सेना को 17 हजार रुपये घूस लेते पकड़वा दिया।
-
संजय के सहायक के रूप में कर रहे थे काम
सीएमओ कार्यालय के कमरा नंबर 22 में लिपिक संजय के सहायक बनकर सुनील सक्सेना काम कर रहा था। वह अक्सर सीएमओ डॉ. रामेश्वर मिश्रा से फाइल पर हस्ताक्षर करवाने जाता था। अब वह पकड़ा गया तो सीएमओ ने कहा कि उसकी यहां तैनाती ही नहीं है। वह यहां पर किसके आदेश से काम कर रहा था, इसकी जानकारी ही नहीं है। कहा कि अब मामला सामने आया है तो जांच करा रहा हूं।
कई लिपिक निशाने पर
एक कर्मचारी भ्रष्टाचार में लिप्त पाये जाने के बाद अब सीएमओ कार्यालय के कई लिपिक निशाने पर आ गए हैं। उनकी गोपनीय जांच के बाद पटल भी बदले जा सकते हैं। इसको लेकर सीएमओ दो दिन में लिपिकों के साथ बैठक भी करेंगे।