मूसाझाग। पिछले दिनों हुई कार्रवाई के बाद गन्ना माफिया कुछ पीछे हटते नजर आए थे। लेकिन अब प्रशासन के निष्क्रिय होते ही माफिया फिर से सक्रिय होने लगे हैं। किसान का शोषण कर गन्ना माफिया जमकर अवैध तरीके से गन्ना खरीद रहा है। मजबूर किसान प्रशासनिक अधिकारियों को भी इसमें मिली भगत का आरोप लगाने लगे हैं।
प्रशासन के लचीले रवैये की वजह से गन्ना माफिया अभी भी सक्रिय बने हुए हैं। हालांकि अब उन्होंने लोगों को गुमराह करने के लिए शोषण करने का अपना तरीका बदल दिया है। अब माफिया रास्ते में ही किसानों से सांठगांठ कर लेते हैं। किसी धर्मकांटे पर गन्ना की तौल कराकर रास्ते में ही ट्राली में गन्ना बदल लेते हैं। इसके लिए कोई जगह भी निश्चित नहीं की गई है। परेशान किसान तुरंत नकद भुगतान मिलने के झांसे में आकर प्रति क्विंटल 160 रुपये से 180 रुपये में गन्ना बेच देते हैं। माफिया फिर गन्ना लेकर चीनी मिल पहुंचते हैं और प्रशासन से सांठगांठ कर मोटा मुनाफा कमाते हैं। इसमें चीनी मिलों का भी अच्छा फायदा होता है। सरकार ने गन्ना का प्रति क्विंटल मूल्य अगेती प्रजाति के लिए 325 रुपये और सामान्य प्रजाति को 315 रुपये मूल्य तय किया है। बाकी बचत चीनी मिलों और दलालों के पेट में जाती है। पिछले दिनों शिकायत मिलने पर प्रशासन ने छापे मारकर गन्ने की एक अवैध मंडी भी पकड़ी थी। वहां मिले दो दलालों को जेल भी भेजा गया था।
गन्ने की अवैध खरीद नहीं होने दी जाएगी। जगह-जगह छापा मारकर गन्ना माफिया पर लगाम कसने को कार्रवाई की जा रही है। - प्रदीप कुमार वर्मा, जिला गन्ना सचिव