उझानी (बदायूं)। कोतवाली क्षेत्र के गांव तेहरा में गुरुवार को पुलिस फोर्स की मौजूदगी में रवेंद्र सिंह के नाम राशन की दुकान का प्रस्ताव पास हो गया। इसे लेकर बुधवार रात में दावेदार दोनों पक्ष के लोग आमने-सामने पड़ गए। पहले तो पथराव हुआ फिर समर्थकों ने छतों पर चढ़कर हवाई फायरिंग कर गांव में दहशत का माहौल बना दिया। देर रात मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्ष के छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों को शांतिभंग करने के आरोप में जेल भेजा गया है।
राशन की दुकान को लेकर दावेदारों में तीन-चार दिन से तनातनी का माहौल था। बुधवार शाम को दोनों पक्ष ने अपने समर्थकों और रिश्तेदारों को इकट्ठा करना शुरू कर दिया। ग्रामीणों को अपने-अपने पक्ष में लामबंद करने के लिए दावेदार देर रात घर से बाहर निकले तो गलियारे में भिड़ गए। कहासुनी के बाद दोनों पक्ष के लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। बाद में दोनों पक्ष की ओर से हवाई फायरिंग भी की गई। इसकी भनक लगते ही प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार चाहर पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने एक पक्ष के बसंत पुत्र तुलसीराम, महावीर पुत्र रामपाल, मोनू श्यामलाल, दूसरे पक्ष से अब्दुल्लागंज निवासी राजकुमार पुत्र छोटेलाल, अजय कुमार पुत्र धनपाल और अहीर टोला मोहल्ले के भगवान सिंह पुत्र विजेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि पुलिस को तलाशी के दौरान किसी के पास भी असलाह नहीं मिला।
चश्मदीद ग्रामीणों की मानें तो फायरिंग करने वाले युवक तो पुलिस को आता देख पहले ही खेतों की ओर भाग गए। पुलिस ने उन्हें पकड़ने के लिए कांबिंग भी की लेकिन उनमें कोई भी हत्थे नहीं आया। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि पथराव में किसी के भी चोट नहीं आई है। उधर, बृहस्पतिवार को राशन की दुकान के प्रस्ताव के लिए प्राथमिक विद्यालय में ग्रामीणों की खुली बैठक शुरू होने से पहले ही भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात करना पड़ा। प्रस्ताव रवेंद्र सिंह के नाम पास हो गया। दूसरे दावेदार वीरेश और प्रधान पंकज यादव ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया। प्रस्ताव पास हो जाने के बाद भी गांव में पुलिस फोर्स को तैनात रखा गया है।
राजनीतिक हस्तक्षेप से बढ़ा विवाद
उझानी। तेहरा गांव पहले बेनीनगला का हिस्सा था। पिछले पंचायत चुनाव में परसीमन के बाद राशन की दुकान बेनीनगला में चली गई तो तेहरा के लिए अलग से दुकान आवंटन को स्वीकृति मिली गई थी। इसके लिए ब्लॉक स्तर से कार्रवाई भी पूरी कर ली गई थी लेकिन खुली बैठक शुरू होने से तीन-चार दिन पहले से राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ा तो माहौल गरमाता चला गया। फायरिंग और पथराव की घटना भी इसी का हिस्सा बताई गई है।