सिलहरी। कुंवरगांव थाने के गांव बल्लिया में एक ग्रामीण ने विषाक्त पदार्थ खाकर जान दे दी। उसके खिलाफ कोर्ट में लंबित एक वाद में फैसला आने वाला है। इसी को लेकर वह कई दिन से अवसाद में था। परिवार वालों ने पुलिस को सूचना दिए बिना ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि राजनीतिक कारणों से उसे फंसाकर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
कुंवरगांव थाने के बल्लिया गांव निवासी 50 वर्षीय द्वारिकी सिंह 2012 में गांव के कोटेदार अनेकपाल के साथ जेल गया था। इस मामले में कोर्ट में सुनवाई चल रही है। बताते हैं कि सुनवाई पूरी हो चुकी है। मामले में अब फैसला आने वाला था। इसको लेकर द्वारिका सिंह कई दिन से अवसाद में था। उसे केस हारने का डर था। हालांकि, द्वारिकी सिंह का राशन कोटे के मामले में कोई लेना देना नहीं था। उसके परिवार वालों का कहना है कि कोर्ट के फैसले के डर से उसने बुधवार रात विषाक्त पदार्थ खा लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। परिवार वालों ने न तो पुलिस को सूचना दी और न ही पोस्टमार्टम कराया। थाना प्रभारी प्रमोद कुमार ने इस संबंध में कोई सूचना होने की बात से इंकार किया है।
ग्रामीण बता रहे ये मामला
परिजनों ने द्वारिकी की मौत के मामले में भले ही पुलिस को सूूचना नहीं दी हो, लेकिन ग्रामीणों की जुबान पर इसकी काफी चर्चा है। ग्रामीणों के अनुसार राजनीतिक कारणों से द्वारिकी को इस मामले में फंसा दिया गया था। दरअसल वर्ष 2012 में कुछ कोटेदार एक पूर्व विधायक के पक्ष के थे, जबकि उस समय सपा की सरकार थी। ऐसे में कोटा निरस्त कराने की बात करते हुए सपा सरकार के एक कद्दावर नेता ने कोटेदार समेत चार लोगों को अपने आवास पर बुलाया था, बाद में खुद को रिश्वत देने की बात कहते हुए पुलिस बुलाकर चारों को पकड़वा दिया था। हालांकि जेल जाने के कुछ समय बाद वे जमानत पर बाहर आ गए थे, लेकिन कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। इसका कुछ दिनों में फैसला सुनाया जाना था। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन पूर्व द्वारिकी ये भी कह रहा था कि उसे मालूम है कि फैसला उसके विपक्ष में आएगा, इससे पहले ही वह खुद को खत्म कर लेगा।