बदायूं। नोएडा की बहुमंजिला इमारत में चार्जिंग के दौरान ई-स्कूटी की बैटरी फटने से हुए भीषण अग्निकांड ने ई-वाहनों के मानकविहीन चार्जिंग प्वाइंटों से लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ई-चार्जिंग प्वाइंटों पर विद्युत संरक्षा, अग्निशमन सुरक्षा के मानकों की जांच करने के लिए भी चेकिंग अभियान नहीं चलाए गए हैं, जबकि सैकड़ों की संख्या में मानकविहीन ई-चार्जिंग प्वाइंट गली, मोहल्लाें, कस्बों में खुले हैं, जहां रोजाना हजारों की संख्या में बैटरियां चार्ज होती हैं।
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 15,632 ई-वाहन जिलेभर में फर्राटा भर रहे हैं। इससे बड़ी संख्या में ई-चार्जिंग प्वाइंटों के अवैध रूप से संचालित होने की भी आशंका भी जताई जा रही है। बिना मानकों और अनुमति के संचालित हो रहे ई-चार्जिंग प्वाइंट आम लोगों के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। बृहस्पतिवार को पड़ताल की गई तो आबादी वाले क्षेत्रों में भी ई-चार्जिंग प्वाइंट संचालित मिले।
विद्युत निगम के आंकड़ों के अनुसार, जिले में 24 एलएमबी-11 कनेक्शन हैं। जिले में चारों डिवीजन में बदायूं डिवीजन में आठ, बिल्सी डिवीजन में सात, बिसौली में चार और उझानी में पांच कनेक्शन धारक हैं। जहां ई-चार्जिंग प्वाइंट बने हैं। एक एलएमबी 11 कनेक्शन पर 20 से 25 ई-रिक्शों की बैटरियां चार्ज होती हैं।
विद्युत निगम के अधिकारियों ने बताया कि ईवी वाहनों के चार्जिंग प्वाइंट के लिए कनेक्शन देने के बाद उनका लोड चेक किया जाता है। 24 प्वाइंट पर अधिक से अधिक से 500 ई-वाहन ही चार्ज हो पाते हैं। इसके अलावा अन्य वाहनों की बैटरियां घरों व दुकानों और खाली प्लॉटों में अवैध रूप से चार्ज की जा रही हैं।
सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, जिले में कुल 15,632 ई-रिक्शा, दोपहिया और चार पहिया वाहन पंजीकृत हैं। एआरटीओ प्रवर्तन हरिओम ने बताया कि वाहन पंजीकरण के समय ही बैटरी और चार्जिंग संबंधी दिशा-निर्देश दिए जाते हैं। इधर, नगर पालिका परिषद बदायूं में भी ई-चार्जिंग प्वाइंट है, उसमें 29 ई-रिक्शाें की बैटरियां चार्ज होती हैं।
ईवी वाहनों की संख्या
ई-रिक्शा- 11244
बाइक- 3534
कार - 854
जिले में एलएमबी- 1 कनेक्शन धारक 24 हैं। इन्हें कनेक्शन देते समय जांच के बाद विद्युत निगम की ओर से एनओसी दी जाती है। साथ ही अवैध चार्जिंग प्वाइंट संचालित करने वालों पर समय- समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। - अजय कुमार, अधीक्षण अभियंता
ईवी बैटरियों में आग लगने के कुछ प्रमुख कारण
- कई बैटरी पैक्स के डिजाइन भारत की भीषण गर्मी के अनुकूल नहीं बनाए जाते।
- बैटरी से निकलने वाली गर्मी को बाहर फेंकने के लिए वाहनों में पर्याप्त और बेहतर कूलिंग न होना भी है।
- लागत कम करने के लिए मार्केट में सस्ती, नकली या बेहद खराब क्वालिटी की बैटरियों का धड़ल्ले से इस्तेमाल हाे रहा है, जो हादसों का कारण बनती हैं।
- गलत रेटिंग वाले, लोकल या खराब मेंटेनेंस वाले चार्जर और सॉकेट्स का इस्तेमाल करना। अक्सर लोग बिना सोचे समझें सस्ते के चक्कर में लोकल चार्जर ले लेते हैं, जो खतरनाक साबित होता है।
इनका रखें ध्यान
- वाहन निर्माता कंपनी की ओर से प्रमाणित और अप्रूव्ड चार्जर ही इस्तेमाल करें।
- किसी भी तरह की खराबी होने पर केवल अधिकृत डीलर या सर्विस सेंटर पर ही जाएं, लोकल मैकेनिक से छेड़खानी न करवाएं।
- वाहन को हमेशा एक हवादार जगह पर ही चार्ज करें। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि आपका इलेक्ट्रिकल सर्किट और वायरिंग सही लोड झेलने के लायक हो।
इनमें से कोई संकेत दिखने पर सतर्क हो जाएं
- बैटरी या वाहन का सामान्य से बहुत ज्यादा गर्म होना।
- बैटरी पैक का हिस्सा फूला हुआ दिखाई देना।
- गाड़ी के पास से कुछ जलने की या अजीब से केमिकल जैसी बदबू आना।
- वाहन या बैटरी बॉक्स से किसी भी प्रकार का धुआं निकलता दिखना।
- बार-बार चार्जिंग का फेल होना या प्लग इन करने पर एरर आना।
नगर पालिका परिसर में चार्जिंग स्टेशन पर चार्ज होते नगर पालिका के ई रिक्शा। संवाद