कादरचौक। 46 साल पहले मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए सीओ समेत तीन पुलिसकर्मियों के शहीद स्मारक पर बृहस्पतिवार को एसएसपी डॉ. बृजेश सिहं ने पुष्पचक्र अर्पित करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद सीओ समेत थाना कादरचौक की पुलिस ने श्रद्धांजलि दी। शहीद दिवस पर पहुंचे शहीदों के परिजनों का सम्मान किया गया। इस मौके पर परिजनों की आंखें नम हो गईं।
डाकुओं के साथ सन 1978 में हुई 24 घंटे की मुठभेड़ में गंगा की तराई में शहीद हुए सीओ रामेंद्र पांडे, हेड कांस्टेबल मोहन लाल गौतम और कांस्टेबल रामदास की शहादत को ग्रामीण हर वर्ष नौ जनवरी को शहीद दिवस के रूप में मनाते हैं। बृहस्पतिवार को तीनों की शहादत में शहीद स्मारक पर एसएसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह, सीओ शक्ति सिंह के साथ पहुंचे।
शहीद स्मारक पर गार्द ने परेड कर सलामी दी। एसएसपी ने कहा कि हम पुलिस वालों को उन जवानों की शहादत हमेशा कर्तव्य के प्रति याद दिलाती है। गांव के लोगों को भी प्रशंसनीय योगदान के लिए याद किया जाएगा, जिन्होंने पुलिस के जवानों की शहादत को अपना परिवार मानकर शहीदों के सम्मान में स्थल का निर्माण कराया।
इस दौरान कादरचौक एसओ उदयवीर सिंह, चौकी इंचार्ज देवेंद्र सिंह के अलावा दिनेश चंद्र शर्मा ,परमजीत सिंह प्रधान, अब्दुल मुत्तलिव प्रधान, जीशान प्रधान, श्याम सुंदर उपाध्याय आदि मौजूद थे।
1978 में काछी गिरोह से हुई थी पुलिस की मुठभेड़
नौ जनवरी 1978 की बात है। सोमवती अमावस्या के दिन गंगा किनारे लगे मेला में दस्यू सरगना भगवान दास काछी गिरोह को एटा जिले के तत्कालीन सीओ रामेंद्रनारायण पांडे खदेड़ कर ला रहे थे। गिरोह के डाकू गंगा में कूद गए फिर भी उन्होंने पीछा नहीं छोड़ा। 24 घंटे चली मुठभेड़ में बदायूं पुलिस के जवान रामदास और मोहनलाल गौतम के शहीद होने के बाद सीओ रामेंद्र नारायण पांडे ने गन्ने के खेत में घुसकर डाकू को गोली मार दी।
खेत में घायल पड़े डाकू ने सीओ के सीने में गोली मार दी। बावजूद इसके उन्होंने डाकू को मार डाला। गांव भदरौल के लोगों ने चंदा कर शहीद स्मारक बनवाया। स्मारक के नाम गांव की भूमि भी दान की गई। हर वर्ष नौ जनवरी को स्मारक पर मेला के आयोजन होता है।
शहीद रामदास की बेटी ने किया नमन
कादरचौक। शहीद रामदास मूलरूप से बरेली के बल्लिया गांव के रहने वाले थे। शादी के कुछ समय बाद ही वह शहीद हो गए थे। उस समय पत्नी गर्भ से थी। कुछ महीनों बाद उसने बेटी को जन्म दिया। बेटी नीलम मां के साथ शहीद स्मारक पर आती रही। अब मां बीमार और बूढ़ी हो चुकी है तो अब वह पति विपिन के साथ लखीमपुर से प्रति वर्ष यहां आती है। बेटी नीलम को शॉल भेंटकर सम्मानित किया गया। वहीं मोहनलाल गौतम, मथुरा के रहने वाले थे। सीओ आरएन पांडेय कानपुर के रहने वाले थे। संवाद
शहीद स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित करतीं शहीद रामदास की बेटी नीलम। संवाद
शहीद स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित करतीं शहीद रामदास की बेटी नीलम। संवाद