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बच्चे खेले नहीं, पर खराब हो गई किट...अब नई खरीदकर गड़बड़ी की तैयारी

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बदायूं। बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से जनपद को इस साल खेल किट खरीदने के लिए धनराशि मुहैया करा दी गई है। विभाग ने सभी विद्यालयों के एसएमसी खातों में इस धनराशि भी भेज दी है, जबकि पूर्व में हुई शिकायतों पर चल रही जांच अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। काफी विद्यालयों में पुराना खेल सामान ही सुरक्षित रखा हुआ है। विभागीय सूत्रों के अनुसार शिक्षकों ने दुकानदारों से फर्जी बिल बनवाना शुरू कर दिए हैं और पुराने सामान को विद्यालय में दर्शाना शुरू कर दिया है।
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सरकार की इच्छा है कि बच्चे पढ़ाई के साथ खेलों में भी पारंगत हों। इसके लिए प्रदेश सरकार ने सर्वशिक्षा अभियान के तहत खेलकूद के लिए धनराशि की व्यवस्था की है। योजना के तहत शासन स्तर से एक माह पहले सरकारी स्कूलों में धनराशि भेजी गई है। इसमें प्राइमरी स्कूलों के लिए पांच- पांच हजार रुपये और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए 10-10 हजार रुपये भेजा गया है, ताकि इन रुपये से खेल सामग्री को खरीदा जा सके, लेकिन शिक्षकों ने इसमें ही खेल करना शुरू कर दिया है। दरअसल कई स्कूलों में अभी पुराना ही खेल सामान रखा है, जिसकी जांच चल रही है।
क्वालिटी थी घटिया तो शिकायत परशुरू हुई थी जांच
खेलकूद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने हर प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल को खेल का सामान खरीदने को 2019 में बजट दिया था, लेकिन अनेक स्थानों से प्रशासन तक इस तरह की शिकायतें आईं कि गुणवत्ता को ताक पर रखकर खेलकूद का सामान माफिया के माध्यम से विद्यालयों में पहुंचा दिया गया है। इस पर तत्कालीन डीएम दिनेश कुमार सिंह ने सभी स्कूलों में खरीदे गए सामान की जांच के निर्देश दिए। इसमें सीडीओ के अलावा बीएसए, सहायक अभियंता डीआरडीए और जिला क्रीड़ाधिकारी को सदस्य बनाया गया, लेकिन डीएम का तबादला होने के कारण यह जांच तक अभी तक किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। कई स्कूूलों में जांच के चलते खेल किटों को खोला ही नहीं गया। अब जब दोबारा इसके लिए धन आ गया है तो पुरानी किटों को ही नया बताकर गोलमाल शुरू कर दिया है।
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दुकानदारों से शिक्षकों ने की सेटिंग
विभागीय सूत्रों का कहना है कि शिक्षकों ने खेल सामान बेचने वाले दुकानदारों से सेटिंग कर ली है। इसके तहत उनके द्वारा पुराने खेल सामान को भी नए सामान के बिल में दर्शाकर पूरा बिल बनवा लिया गया है। बाकी बेची धनराशि को आपस में बंदरबांट कर लिया गया है। इसके अलावा शासन स्तर से खेल सामग्री खरीदने के लिए कोई बाध्यता भी नहीं जारी की गई हैं। उन्होंने एसएमसी के सदस्यों को छूट दी है कि वे कहीं सेे भी खेल सामान को खरीद सकते है। इसका फायदा भी शिक्षकों ने इस बार जमकर उठाया है। क्योंकि इस बार उन पर जनप्रतिनिधियों का दवाब नहीं पड़ा है।
अभी तक इस तरह की कोई शिकायत नहीं आई है। फिलहाल शासन की तरफ से नई खेल सामग्री खरीदने के लिए रुपये दिए गए है। अगर किसी ने इसमें पुराने सामान को जोड़कर हेराफेरी की है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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- रामपाल सिंह राजपूत, बीएसए
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