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दोहरे हत्याकांड में दो सगे भाइयों सहित चार को आजीवन कारावास

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बदायूं। करीब छह साल पहले खेत पर कब्जा करने की रंजिश में दो सगे भाइयों की हत्या के मामले में नामजद दो सगे भाइयों सहित चार को जिला सत्र न्यायाधीश रमेश चंद्र दिवाकर ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। चारों आरोपियों पर कोर्ट ने 2.30 लाख रुपये का जुर्माना भी डाला है, वहीं चार अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है।
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दोहरे हत्याकांड का मामला थाना बिनावर के गांव ओझा का है। गांव निवासी असलम पुत्र जाकिर हुसैन ने आठ अक्टूबर 2013 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके चाचा के खेत पर कब्जा करने की नीयत से गांव के कैसर पुत्र अफसर, वकील व शकील पुत्रगण फकीरी, साबिर पुत्र बेंचे, इस्माइल पुत्र सद्दू उर्फ इरशाद अली, आसिब व राशिद पुत्रगण असरत अली, अरगून पुत्र अमीनुद्दीन ने कुछ दिन पहले ईंटे डाल दी थी। उसने, उसके चाचा और भाइयों ने इसका विरोध किया। इसी बात पर सभी आरोपियों ने गाली गलौज की और जान से मारने की धमकी दी।
आठ अक्टूबर 2013 की सुबह आठ बजे वह अपने भाइयों सग्गन व नवासे, चाचा भूरे और सारिफ के साथ टयूबवेल पर जा रहा था तभी कैसर, वकील, शकील, साबिर, इस्माइल, आसिब, राशिद और अरगून ने उसे और उसके भाईयों को घेर लिया। सभी ने रायफल और तमंचों से ताबड़तोड़ फायरिंग की। वह, उसके भाई और चाचा अपनी जान बचाकर भागे। फायरिंग से उसके दो भाई सग्गन और नवासे की मौके पर ही मौत हो गई।
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असलम ने कैसर, वकील, शकील, साबिर, इस्माइल, आसिब, राशिद और अरगून के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने विवेचना के बाद सभी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। जिला सत्र न्यायाधीश रमेश चंद्र दिवाकर ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से प्रभारी डीजीसी अनिल सिंह राठौड़ और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने कैसर, वकील, शकील और साबिर को मुजरिम करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने कैसर और वकील पर 60-60 हजार रुपये और शकील और साबिर पर 55-55 हजार रुपये का जुर्माना डाला है, जबकि इस्माइल, आसिब, राशिद और अरगून को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है।
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