बदायूं। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर खेलकूद प्रतियोगिताओं के लिए वार्षिक कैलेंडर जारी कर दिया गया है मगर, जिले के 2155 स्कूलों से 1899 में व्यायाम शिक्षक या खेल अनुदेशक ही नहीं हैं। यही नहीं कई स्कूलों में खेल का मैदान भी उपलब्ध नहीं हैं। अब सवाल यह है कि मूलभूत सुविधाओं के बिना परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले खिलाड़ी कैसे नाम रोशन कर पाएंगे।
बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। समय-समय पर इन विद्यालयों के बच्चों ने जिला व राज्य स्तर पर नाम रोशन किया है। हर साल न्याय पंचायत, ब्लॉक, तहसील और जिला स्तर पर विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिताएं चरणबद्ध तरीके से प्रतियोगिताएं होती हैं।
शैक्षिक सत्र 2024-25 के लिए भी विभाग की ओर से खेलकूद प्रतियोगिताओं का वार्षिक कैलेंडर घोषित किया है। निर्देश हैं कि कैलेंडर में दिए गए कार्यक्रम के अनुसार प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया जाए, लेकिन विभागीय अधिकारी इस बात को लेकर गंभीर नहीं दिख रहे हैं।
स्कूलों में छात्र-छात्राओं के लिए खेल के मैदान बनाने की कोई कार्ययोजना नहीं है। ऐसे में बच्चे किस तरह प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर पाएंगे यह भविष्य ही बताएगा।
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आंकड़ों पर नजर
- प्राथमिक स्कूल- 1502
- उच्च प्राथमिक स्कूल- 356
- कंपोजिट स्कूल- 297
- करीब सवा तीन लाख पंजीकृत विद्यार्थी जिले में
जिले में सिर्फ 256 खेल अनुदेशक
विभाग की ओर से 2013 में खेल अनुदेशक की भर्ती की गई थी। उस दौरान जिले में विभिन्न विषयों के अनुसार 700 अनुदेशकों को तैनाती हुई। वर्तमान में 256 खेल अनुदेशक जिले में हैं। साथ ही प्रत्येक ब्लॉक में एक-एक व्यायाम शिक्षक तैनात है। इनके कंधों पर 2155 स्कूलों के छात्र-छात्राओं की जिम्मेदारी है।
क्या बोले शिक्षक नेता
सरकार को चाहिए पहले सभी स्कूलों में खेल शिक्षक तैनात करें। विद्यालयों में खेल मैदान की व्यवस्था भी करनी चाहिए। - संजीव शर्मा, प्रांतीय प्रचार मंत्री, उत्तर प्रदेशीय शिक्षक संघ