बदायूं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित आयुष्मान भव स्वास्थ्य मेला कागजों में तो पूरी तरह सफल दिखाया गया, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग रही। अभिलेखों में दो-दो विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती दिखाई गई, जबकि कई जगह डॉक्टर अवकाश पर थे। तो कुछ समय से पहले लौट गए। इसकी वजह से मरीजों को विशेषज्ञ उपचार नहीं मिल सका और मेला औपचारिकता बनकर रह गया।
जिले के 16 सीएचसी पर आयुष्मान भव स्वास्थ्य मेले का आयोजन किया गया। मेला में दो-दो विशेषज्ञाें की ड्यूटी लगाई गई, ताकि तमाम मरीजों को उनका लाभ मिल सके, लेकिन मेला में हकीकत बिल्कुल उलटी नजर आयी। मेला में कई ऐसे विशेषज्ञ डॉक्टरों की ड्यूटी लगा दी। जो पहले से अवकाश पर चल रहे थे। वहीं, कुछ डॉक्टर केवल औपचारिकताएं निभाते हुए कुछ देर में वापस लौट गए।
इसकी वजह से मरीजों को आयुष्मान भव स्वास्थ्य मेला का लाभ नहीं मिला। बल्कि मेला में केवल औपचारिकताएं ही निभाई गई। इसके अलावा अधिकांश डाॅक्टर ऐसे थे, जिनको शाम को जानकारी दी कि सुबह उनकी ड्यूटी मेला में लगाई गई है। इनमें कई देर से पहुंचे। मजबूरी में मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ा और कई को बिना इलाज लौटना पड़ा। स्वास्थ्य मेले का उद्देश्य ग्रामीण व कस्बाई क्षेत्रों के मरीजों को विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराना था, लेकिन विशेषज्ञों की अनुपस्थिति और अव्यवस्थित प्रबंधन के कारण यह उद्देश्य पूरा नहीं हो सका।
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औपचारिकता बनकर रह गया मेला
सैदपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आयोजित आयुष्मान भव स्वास्थ्य मेले में कुल 107 मरीजों का परीक्षण किया गया, इसमें अधिकांश मरीज रैबीज से संबंधित थे। सीएमओ कार्यालय की ओर से स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में डॉ. अनामिका की ड्यूटी लगाई गई थी, जबकि वह पहले से अवकाश पर थीं। इसके बाद आनन-फानन में डॉ. रुचि की ड्यूटी लगाई गई। हालांकि डॉ. रुचि ने केवल औपचारिक उपस्थिति दर्ज कराई और समय से पहले लौट गईं। इससे महिला मरीजों को काफी परेशानी हुई। कई महिलाएं घंटों इंतजार करती रहीं लेकिन उन्हें विशेषज्ञ परामर्श नहीं मिल सका। मरीजों का कहना है कि मेला केवल कागजों में सफल रहा, जमीनी स्तर पर व्यवस्था बेहद कमजोर रही।
अवकाश पर डॉक्टर की लगा दी ड्यूटी
आसफपुर। सीएचसी पर आयोजित आयुष्मान भव स्वास्थ्य मेला में विशेषज्ञ के रूप में डॉ. गौरव वार्ष्णेय और डॉ. मनोज कुमार की ड्यूटी लगाई गई थी। इसमें डॉ. मनोज कुमार पहले से अवकाश पर थे, इसके बावजूद उनकी ड्यूटी सूची में नाम दर्ज कर दिया गया। इस कारण वह मेला में उपस्थित नहीं हो सके। मरीजों को उम्मीद थी कि विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध रहेंगे, लेकिन उन्हें केवल सामान्य डॉक्टरों से ही इलाज कराना पड़ा। हालांकि फार्मासिस्ट महेंद्रनाथ, सुशीला शर्मा, नीलम, मंजू और राजरानी सिंह मौजूद रहे, लेकिन विशेषज्ञ सेवाओं के अभाव में मरीज संतुष्ट नजर नहीं आए। संवाद
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ड्यूटी लगा दी, पर नहीं दी जानकारी
ककराला। सीएचसी पर आयोजित आयुष्मान भव स्वास्थ्य मेला में 122 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाएं वितरित की गईं। यहां डॉ. संतीश चंद्र और डॉ. यतेंद्र सिंह की विशेषज्ञ के रूप में ड्यूटी लगाई गई थी। लेकिन डॉ. यतेंद्र सिंह मेला में नहीं पहुंचे। डॉ. यतेंद्र सिंह ने बताया कि उन्हें इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग से कोई सूचना नहीं दी गई थी। इसकी वजह से वह मेला में नहीं गए। सूचना के अभाव में वह उपस्थित नहीं हो सके, जिससे मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श नहीं मिल पाया।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित आयुष्मान भव स्वास्थ्य मेला में यदि कहीं डॉक्टर नहीं पहुंचे है या फिर कोई लापरवाही हुई है। इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ