कुंवरगांव। एक समय था जब नए साल की शुरुआत ग्रीटिंग कार्ड से होती थी। लोग अपने सगे-संबंधियों, मित्रों और शुभचिंतकों को हाथों से लिखे शुभकामना संदेश भेजते थे। कार्ड पर लिखे शब्दों में अपनापन, भावनाएं और इंतजार की मिठास होती थी।लेकिन अब यह परंपरा लगभग समाप्त हो चुकी है।
आधुनिकता और डिजिटल युग में सोशल मीडिया ने ग्रीटिंग कार्ड के चलन को पीछे छोड़ दिया है। व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल साइट्स पर नए साल की शुभकामनाएं सेकंडों में सैकड़ों लोगों तक पहुंच जाती हैं। एक क्लिक पर भेजे गए मैसेज ने मेहनत, समय और भावनाओं से जुड़े कार्ड को हाशिए पर पहुंचा दिया है।
ग्रीटिंग कार्ड केवल कागज नहीं होते थे, बल्कि भावनाओं का आईना होते थे। हाथ से लिखा एक-एक शब्द अपनापन दर्शाता था। महीनों तक कार्ड संभालकर रखने का अलग ही सुख होता था, जो मोबाइल मैसेज में नहीं मिल सकता। - डाॅ. जुगेंद्र पाल सिंह, वरिष्ठ नागरिक
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पहले दिसंबर आते ही ग्रीटिंग कार्ड की मांग बढ़ जाती थी। लोग कार्ड चुनने में समय लगाते थे, अब पूरा सीजन सूना निकल जाता है। सोशल मीडिया ने इस कारोबार को लगभग खत्म कर दिया है। - विजेंद्र पाल, दुकानदार
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सोशल मीडिया से शुभकामनाएं देना आसान हो गया है। समय की कमी के चलते लोग अब तुरंत मैसेज भेज देते हैं, लेकिन कार्ड भेजने की जो खुशी और इंतजार होता था, वह अब यादों में सिमट गया है। - अनीता माहेश्वरी गृहणी
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सोशल मीडिया आज की जरूरत बन चुका है। एक ही मैसेज से सभी को शुभकामनाएं मिल जाती हैं। हालांकि उन्होंने माना कि ग्रीटिंग कार्ड का अपना अलग आकर्षण था, जिसे नई पीढ़ी ने कभी ठीक से महसूस ही नहीं किया। - कनक महाजन, छात्रा
दुकान पर सजे ग्रीटिंग कार्ड। संवाद- फोटो : संकुल स्तरीय संघ की महिलाओं को दिया जाता प्रशिक्षण।
दुकान पर सजे ग्रीटिंग कार्ड। संवाद- फोटो : संकुल स्तरीय संघ की महिलाओं को दिया जाता प्रशिक्षण।
दुकान पर सजे ग्रीटिंग कार्ड। संवाद- फोटो : संकुल स्तरीय संघ की महिलाओं को दिया जाता प्रशिक्षण।
दुकान पर सजे ग्रीटिंग कार्ड। संवाद- फोटो : संकुल स्तरीय संघ की महिलाओं को दिया जाता प्रशिक्षण।