बदायूं। शहर में जाम की समस्या के साथ अव्यवस्थित यातायात और पार्किंग का न होना व्यापारियों को परेशान कर रहा है। यह ऐसी समस्याएं हैं जिनका निस्तारण स्थानीय स्तर पर ही हो सकता है, लेकिन समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। इसके अलावा बदायूं से दिल्ली और लखनऊ के लिए सीधी रेल सेवा न होना भी परेशानी का कारण है। बृहस्पतिवार को बदायूं क्लब में अमर उजाला की ओर से आयोजित व्यापारियों से संवाद में कई ज्वलंत मुद्दे उठे।
व्यापारियों ने जीएसटी की विसंगतियों, रोडवेज स्टैंड के पास डग्गामारी, प्रमुख चौराहों पर खराब पड़ीं ट्रैफिक लाइट, अव्यवस्थित ढंग से टेंपो और ई-रिक्शा के संचालन पर खुलकर बात रखी। शहर में जलभराव, टूटी सड़कें और बाजारों में अतिक्रमण पर भी व्यापारी बोले। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटवाने में व्यापारी भी सहयोग करते हैं। भेदभाव न हो अतिक्रमण कर सड़कों को संकरा करने वालों से मोटा जुर्माना वसूला जाए। कहा-अव्यवस्थित यातायात और शहर में कोई पार्किंग न होना बड़ी समस्या है। जिम्मेेदार इसको नजरअंदाज करते हैं।
व्यापारियों ने दातागंज तिराहा, अंबेडकर पार्क, पुराना आंवला बस स्टैंड, वाटर वर्क्स इलाके में खड़े होने वाले वाहनों और डग्गामारी को लेकर भी गुस्सा जाहिर किया। यह भी कहा कि शहर में कई ऐसे स्थान हैं जहां पार्किंग की व्यवस्था की जा सकती है। व्यापारी और गांवों से आने वाले खरीदार अपने वाहन यहां खड़े कर सकते हैं। पार्किंग न होने से सभी को समस्या होती है और जाम भी लगता है। दूर गांव से आने वाले ग्रामीण बाजारों तक कैसे पहुंचें।
धड़ल्ले से खुल रहे शॉपिंग मॉल और सरकार की शॉपिंग मॉल और छोटे व्यापारियों को लेकर दोहरी नीति को लेकर भी नाराजगी जताई। इस मौके पर शोंटू गुप्ता, संजीव आहूजा, पीके सक्सेना, अमित वैश्य, लवकेश गुप्ता, राजेश कुमार गुप्ता, अवधेश यदुवंशी, रिषभ नारंग, दीपक सक्सेना, सौरभ गुप्ता, विनय गुप्ता, शनि साहनी, मुनीष जुनेजा, सोनू वर्मा, पवन वैश्य आदि व्यापारी मौजूद रहे।
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व्यापारियों का दर्द...हमारे वाहनों के पहियों में सूजा घुसेड़ देते हैं सिपाही
व्यापारियों का दर्द था कि वह कोरोना के चलते पहले से ही परेशान हैं। एक तो शहर में पार्किंग नहीं है और दूसरा जाम की समस्या बनी रहती है। खरीदार और व्यापारी अपने वाहनों को कहां खड़ा करें। अगर वाहन दुकान के सामने खड़े होते हैं तो उनका चालान कर दिया जाता है या फिर सिपाही वाहनों के पहियों में सूजा घुसेड़कर पंक्चर कर देते हैं। संवाद के दौरान व्यापारियों ने आए दिन हो रहीं लूट की घटनाओं पर भी चिंता जाहिर की।
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यह बोले व्यापारी
समस्या एक नहीं है, संगठन के माध्यम से व्यापारी बार-बार अधिकारियों को अवगत भी कराते हैं, लेकिन जिम्मेदारों में इच्छाशक्ति नहीं होने के कारण जाम और पार्किंग जैसी समस्याओं का भी निपटारा नहीं हो पा रहा।
-नवनीत गुप्ता शोंटू, व्यापारी नेता
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जीएसटी की पेंचीदगियों के कारण भी परेशानी है। शॉपिंग मॉल और व्यापारियों को लेकर सरकार की दोहरी नीति ठीक नहीं। स्थानीय स्तर पर भी समस्याएं कम नहीं हैं। समस्याओं के समाधान में व्यापारी भी पूरा सहयोग करेंगे।
-संजीव आहूजा, व्यापारी
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ई-रिक्शा, टेंपो के अव्यवस्थित संचालन के कारण जाम लगता है। शहर में नो एंट्री का तो पालन ही नहीं हो रहा। पार्किंग न होने से व्यापारी और ग्राहक दोनों को समस्या होती है। समस्याओं का निपटारा कराने की ओर किसी का ध्यान नहीं।
-पीके सक्सेना, व्यापारी
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यातायात व्यवस्था का बुरा हाल ई-रिक्शा की वजह से है। ई-रिक्शा के रूट भी निर्धारित नहीं हैं। जहां मर्जी होती है वहां ई-रिक्शा रोक दिया जाता है। शहर में पार्किंग न होने से आस-पास के गांवों से आने वाले ग्राहकों को ज्यादा समस्या होती है।
-लवकेश गुप्ता, युवा व्यापारी नेता
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समस्याएं तो तमाम है, लेकिन निपटारे पर किसी का ध्यान नहीं। पार्किंग के लिए शहर में कई जगह भी हैं। नगर पालिका अगर अनुमति दे तो व्यापारी खुद ही इन जगहों पर पार्किंग की सुविधा विकसित कर लेंगे। इससे समस्या नहीं रहेगी।
-अतुल वैश्य, व्यापारी
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स्थानीय स्तर पर व्यापारियों की समस्याओं और मांगों की उपेक्षा की जा रही है। यह ठीक नहीं है। व्यापारी खुद व्यवस्थाओं को सुधारने में सहयोग करता है, लेकिन जिम्मेदार लोग ही मुंह मोड़े रहते हैं। शहर में सफाई तक ढंग से नहीं हो रही। -राजीव गुप्ता, व्यापारी