बदायूं। केद्र सरकार ने रबी की छह फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य का एलान किया है। गेहूं का भाव 40 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है। इसके अलावा जौ, सरसों, मसूर, चना और सूरजमुखी की कीमतों में भी इजाफा किया है। बदायूं मुख्य रूप से गेहूं, धान और गन्ना उत्पादन वाला क्षेत्र है। हालांकि, यहां मसूर, चना का भी उत्पादन होता है। गेहूं और धान के साथ गन्ना का बहुतायत में उत्पादन होता है। किसानों ने गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 40 रुपये के इजाफे को नाकाफी बताया है। किसानों का कहना है कि फसल की लागत में लगातार इजाफा हो रहा है। सरकार किसानों की आमदनी दोगुनी करने की बात कहती है लेकिन उपज का सही मूल्य देने को तैयार नहीं। गन्ना किसानों का भुगतान नहीं होता।
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ये बोले किसान
गेहूं के समर्थन मूल्य में 40 रुपये क्विंटल का इजाफा नाकाफी है। डीजल, पेट्रोल के दाम आसमान पर है। फसलों की लागत बढ़ रही है। फसलों के मूल्य में इजाफा लागत के अनुपात में नहीं हो रहा।
-राजेश सक्सेना
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जिले में गन्ना, गेहूं और धान की पैदावार सबसे ज्यादा होती है। गन्ना किसानों को भुगतान नहीं होता। गेहूं और धान की फसल का सही मूल्य नहीं मिलता। क्रय केंद्रों पर शोषण होता है।-अभिलाख
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सरकार ने वायदा किया था कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी। लेकिन किसान की हालत अब भी वैसी की वैसी है। किसान को फसल का सही समय पर सही मूल्य नहीं मिलता।
-दुर्गपाल
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कृषि कानून लाकर सरकार किसानों को गुलाम बनाना चाहती है। कृषि कानूनों को लागू करने के लिए ही रबी की सफलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में मामूली इजाफा किया गया है।
-राजीव गुप्ता