गंगा में जलस्तर बढ़ने से सरौता के पास टापू पर रात बजे तक फंसे रहे युवकों समेत 12 बच्चों के मामले में रेस्क्यू सफल हो जाने के बाद प्रशासन ने राहत महसूस की है। हालांकि बच्चे भी खुश है लेकिन जब वह सकुशल गांव पहुंचे तो घरवालों के चेहरे खिल उठे।
हरिद्वार से छोड़े गए पानी की वजह से गंगा में बढ़ जलस्तर के चलते रविवार को कोतवाली क्षेत्र के गांव सरौता के पास गंगा में अस्थाई नहर की साइड में बना बांध क्षतिग्रस्त हो गया था। आसपास इलाके पर भी बाढ़ का पानी पहुंच जाने से सरौता निवासी युवकों के साथ 12 बच्चे गंगा में एक टापू पर फंस गए थे। ये सभी पशु चराने के लिए घर से निकले थे। शाम को जब इनमें कोई घर नहीं लौटा तो घरवाले गंगा किनारे पहुंचे। ग्रामीणों की सूचना पर राजस्व विभाग की टीम और कछला चौकी पुलिस ने पंखियानगला के लोगों के मदद से रेस्क्यू चलाया था।
रेस्क्यू के दौरान ही उन्हें नाव के जरिए सकुशल बाहर निकाल लिया गया था। देर रात बच्चों के साथ युवक घर पहुंचे तो परिवार के लोगों के चेहरे खिल उठे। ग्रामीणों में जागन ने बताया कि किसी को भी बच्चों के टापू पर फंसे होने की भनक नहीं थी। बाहर निकाले गए बच्चों ने करीब पांच घंटा तक जिंदगी और मौत से संघर्ष की दास्तां भी घरवालों को सुनाई। बच्चों में राहुल और अंकित कुमार बिलखते रहे। रामकिशोर और हरीओम शर्मा उनका साहस बढ़ाता रहे। बच्चों का सकुशल बाहर निकाल लिए जाने से खुश उनके घरवालों ने चौकी इचार्ज मानपाल सिंह, राजस्व निरीक्षक जुगेंद्र सिंह और लेखपाल ओमबाबू नागेंद्र की भी तारीफ की।
सरौता के ग्रामीणों ने किया था नहर का विरोध
गंगा की तलहटी में करीब तीन साल पहले कासगंज जिला प्रशासन ने अपने जिले के तटवर्ती गांवों को बाढ़ की विभाषिका से बचाने के लिए अस्थाई नहर खुदवा दी थी। उसका रूख सरौता गांव की ओर कर अधूरा छोड़ दिया गया था। पिछले साल भी जब बाढ़ आई तो सरौता के ग्रामीणों को ज्यादा नुकसान हुआ था। नहर की खुदाई के दौरान बांध जैसी दीवार बन गई थी। रविवार दोपहर में जलस्तर बढ़ने पर पानी का रेला पहुंचा तो वह जवाब दे गई। ग्रामीणों की मानें तो अस्थाई नहर का शुरू से ही विरोध किया था।