बदायूं। ग्रामीण इलाकों में लंबे समय तक महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बेहद सीमित रहे हैं, लेकिन सरकार की महत्वाकांक्षी बैंक सखी योजना ने अब गांवों की महिलाओं के जीवन में नई रोशनी भर दी है। योजना से जुड़कर यहां की 140 महिलाएं न सिर्फ आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ साबित हो रही हैं।
जिले की 1037 ग्राम पंचायतों में करीब 19 हजार स्वयं सहायता समूहों का संचालन हो रहा है।। इनमें करीब दो लाख महिलाएं जुड़ी हैं। आज कई बैंक सखियां गांव–गांव में बैंकिंग सेवाएं पहुंचाकर ग्रामीणों की मदद कर रही हैं। ऐसा करके वह नियमित नौकरी करने वाले पुरुषों से भी अधिक आय अर्जित कर रहीं हैं।
जिले में इस समय 140 बैंक सखी सक्रिय हैं, जो राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं। डिजिटल और वित्तीय सेवाओं की पहुंच ग्रामीणों तक सहजता से पहुंचाने में ये महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहीं हैं। सरकार की ओर से प्रत्येक बैंक सखी को 4,000 रुपये महीना मानदेय दिया जाता है। इसके साथ ही लेन-देन पर मिलने वाले कमीशन से उनकी आय और भी बढ़ जाती है। बैंक सखियां घर-घर जाकर जमा-निकासी, जनकल्याणकारी योजनाओं का सत्यापन, पेंशन, सब्सिडी आदि के भुगतान जैसी सेवाएं उपलब्ध करा रहीं हैं। (संवाद)
बीसी सखी बनने की प्रक्रिया आसान
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के स्तर से संचालित स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाओं के बैंक सखी बनने की प्रक्रिया बेहद सरल है। हर पात्र महिला इसके लिए आवेदन कर सकती है। इसके लिए इच्छुक महिलाओं को अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, पासपोर्ट साइज फोटो, मोबाइल नंबर, निवास प्रमाणपत्र जमा कर आवेदन करना होता है। प्राथमिकता के आधार पर स्वयं सहायता समूह के माध्यम से चयन कर महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसके बाद उन्हें बैंकिंग सेवाओं से जोड़ दिया जाता है।
खुद को मिला रोजगार, दूसरों की कर रहीं मदद
बैंक सखी का काम करने वालीं अलका चौहान ने बताया कि जब से यह काम शुरू किया है आर्थिक मजबूती मिली है। अनुष्का साेलंकी का कहना है कि इस योजना से महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन रहीं हैं। रजनी व नीलम देवी ने बताया कि वह महिलाओं को बैंकिंग संबंधी सभी जानकारी देती हैं। बैंक सखी प्रियंका व समता का कहना है कि वह गांव-गांव जाकर महिलाओं को बैंकिग से जुड़ी जानकारी देती हैं और उनकी हर संभव मदद करती हैं।
स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं बैंक सखी का काम कर रही हैं। जिले में 140 महिलाएं इस समय बैंक सखी के रूप में कार्यरत हैं। वह समूह से जुड़ी महिलाओं को बैंकिंग संबंधी जानकारियां देने के साथ उनकी समस्या का निस्तारण करवाती हैं। - बृजेंद्र शुक्ला, उपायुक्त स्वत: रोजगार
ग्राम लक्ष्मीनग्ला में महिलाओं को बैंक योजनाओं के बारे में जानकारी देती बैंक सखी प्रियंका। स्रो
ग्राम लक्ष्मीनग्ला में महिलाओं को बैंक योजनाओं के बारे में जानकारी देती बैंक सखी प्रियंका। स्रो
ग्राम लक्ष्मीनग्ला में महिलाओं को बैंक योजनाओं के बारे में जानकारी देती बैंक सखी प्रियंका। स्रो