महिला अस्पताल में संचालित अल्ट्र्रासाउंड सेंटर में लगा ताला। संवाद
बदायूं। महिला अस्पताल में दो दिन से अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे हैं। अस्पताल आने वाले मरीजों को दवा तो मिल रही है, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट न होने से जांच नहीं हो पा रही। मरीजों को डाॅक्टर दूसरे सरकारी अस्पतालों में जांच के लिए भेज रहे हैं। सरकारी में वेटिंग मिलने पर गर्भवती व सामान्य मरीज निजी केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड कराने को मजबूर हैं।
महिला अस्पताल 100 बेड हॉस्पिटल नवंबर 2016 में शुरू हुआ था। अस्पताल में रोजाना 300-400 मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। इनमें से हर दिन 40 से 50 मरीजों को डॉक्टर अल्ट्रासाउंड जांचें लिख रहे हैं। यहां तैनात रेडियोलाॅजिस्ट 15 दिन के अवकाश पर चले हैं। ऐसे में डॉक्टर मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए अन्य सरकारी अस्पतालों में कराने की सलाह दे रहे हैं। वहां पर पहले से अधिक लोड होने से मरीजों की जांच संभव नहीं हो पा रही है।
मजबूरी में बाहर से कराई जांच
सहसवान से आई सात माह की गर्भवती ओमवती का इलाज अस्पताल से चल रहा है। डॉक्टर ने डेढ़ हफ्ते पहले अल्ट्रासाउंड जांच लिखी थी। अस्पताल में जांच की सुविधा न होने पर दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई। वहां एक हफ्ते बाद जांच के लिए बुलाया गया। उन्होंने बताया कि मजबूरी में 600 रुपये खर्च कर निजी केंद्र से जांच कराई।
सेंटर में लगा मिला ताला, निजी केंद्र से कराई जांच
कासिमपुर निवासी नीतू ने बताया कि उसका महिला अस्पताल से इलाज चल रहा है। वह छह माह की गर्भवती है। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड कराके रिपोर्ट दिखाने को कहा। महिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड सेंटर पर पहुंचे तो गेट में ताला लगा मिला। खून से जुड़ी जांच अस्पताल में मुफ्त में हो गई, मगर अल्ट्रासाउंड जांच के लिए निजी केंद्र जाना पड़ा, जहां पांच सौ रुपये खर्च करने पड़े।
अस्पताल में तैनात रेडियोलॉजिस्ट दो सप्ताह की छुट्टी पर गए हैं। दूसरा कोई रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। इससे अल्ट्रासाउंड सेंटर बंद है। उनके आने के बाद ही अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा मिल सकेगी। - शोभा अग्रवाल, सीएमएस महिला अस्पताल