गुप्ता चौक पर चल रही रामकथा में पिनौनी से आए कथावाचक अशोक दीक्षित ने बताया कि जब राजा दशरथ ने अपने को दर्पण में देखा तो उनका एक बाल सफेद पड़ गया था । तब उन्होंने सोचा कि अब मुझे राजपाठ छोड़कर वन में जाकर भगवान का भजन करना चाहिए। यह सोचकर राजा दशरथ ने अपने मंत्रियों और गुरुओं को बुलाकर श्रीराम के राजतिलक के बारे में विचार किया।