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मौलाना पर नई मुसीबत: घर पर वसूली का नोटिस चस्पा, तौकीर भी निकला बड़ा चालाक; बेच चुका बदायूं की सारी संपत्ति

Thu, 09 Oct 2025 09:01 PM IST
विकास कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं

सार

बहुउद्देश्यीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति (बी-पैक्स) रसूलपुर पुठी, विकासखंड सालारपुर ने एक पुराने ऋण प्रकरण में अंतिम वसूली नोटिस जारी किया है। 
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मौलाना तौकीर रजा के घर वसूली का नोटिस चस्पा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के बदायूं जिले के ग्राम करतौली थाना बिनावर निवासी मौलाना तौकीर रजा एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई के घेरे में हैं। इस बार मामला किसी बयानबाजी या आंदोलन का नहीं, बल्कि तीन दशक पुराने सहकारी बैंक कर्ज से जुड़ा है, जिसकी रकम अब ब्याज सहित करीब 28 हजार 386 रुपया से ज्यादा तक पहुंच चुकी है। इसकी वसूली के लिए बहुउद्देश्यीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति (बी-पैक्स), रसूलपुर पुठी के सचिव हिरदेश कुमार ने टीम के साथ पहुंचकर गुरुवार शाम को बरेली स्थित मौलाना के घर पर वसूली की नोटिस चस्पा की है। 15 दिन में इसका जवाब न देने पर मौलाना की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई की जा सकती है।

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अंतिम वसूली नोटिस जारी
बहुउद्देश्यीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति (बी-पैक्स) रसूलपुर पुठी, विकासखंड सालारपुर ने एक पुराने ऋण प्रकरण में अंतिम वसूली नोटिस जारी किया है। समिति द्वारा यह नोटिस तौकीर रजा पुत्र रिहान खान, निवासी निकट आला हजरत दरगाह, बिहारीपुर बाल, जनपद बरेली के नाम जारी किया गया है।

फसली ऋण के रूप में लिए थे 5055.60
समिति के अनुसार तौकीर रजा ने 29 अक्तूबर 1990 को फसली ऋण के रूप में 5055.60 की धनराशि ली थी। लेकिन अब तक ऋण की अदायगी न किए जाने के कारण यह खाता एनपीए में परिवर्तित हो चुका है। इसको लेकर बीते 8 अक्तूबर तक इन पर 28,346 रुपये की देनदारी बताई गई है। समिति द्वारा जारी अंतिम वसूली नोटिस में कहा गया है कि संबंधित व्यक्ति को 15 दिनों के भीतर संपूर्ण बकाया राशि ब्याज सहित जमा करनी होगी, अन्यथा सहकारी समिति अधिनियम 1965 की धाराओं के अंतर्गत उनके विरुद्ध राजस्व वसूली की कार्यवाही आरंभ की जाएगी। यह नोटिस समिति की तरफ से बीते 1 अक्तूबर को जारी किया गया है।

1997 में खुला मामला
रसूलपुर पुठी साधन सहकारी समिति से वर्ष 1990 में मौलाना तौकीर रजा ने 5,560 रुपये का कृषि कर्ज लेकर खाद और बीज खरीदे थे। बाद में वर्ष 1996 में राज्य सरकार ने किसानों के कर्ज माफ करने की घोषणा की, लेकिन मौलाना के खाते में यह माफी लागू नहीं हुई। 1997 में बैंक जांच में खुलासा हुआ कि उनके नाम पर लिया गया कर्ज अब भी लंबित है। बैंक की ओर से कई बार वसूली नोटिसें जारी की गईं, लेकिन मौलाना के प्रभाव और राजनीतिक रुतबे के कारण भुगतान नहीं किया गया।

बरेली हिंसा प्रकरण के बाद फिर खुली पुरानी फाइलें
हाल में बरेली हिंसा प्रकरण में मौलाना तौकीर रजा का नाम उछलने के बाद जिला सहकारी बैंक ने पुरानी फाइलें खंगालनी शुरू कीं। जांच में सामने आया कि मौलाना के ऊपर अब तक 21,940 रुपये ब्याज और 5,560 रुपये मूलधन मिलाकर कुल 28,386 रुपये का बकाया है। बैंक अब इस पर दो प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज भी लगाने जा रहा है।

बदायूं की संपत्तिया पहले ही बेच चुके हैं मौलाना
जिला सहकारी बैंक बदायूं के मुख्य कार्यपालक अधिकारी हरिबाबू भारती ने बताया कि जांच में यह भी पता चला है कि मौलाना तौकीर रजा ने बदायूं जिले में अपनी अधिकांश संपत्तियां पहले ही बेच दी हैं। ऐसे में बैंक की नजर अब उनकी बरेली और अन्य जिलों में स्थित संपत्तियों पर है। उन्होंने बताया कि बैंक इनके खिलाफ पहले ही नोटिस जारी कर चुकी है। बीते साल 10 हजार ऐसे लोगों को नोटिस जारी हुई थी जो बकाएदार हैं। मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने कहा कि बैंक अपना बकाया वसूली करेगी। इसके लिए मौलाना की जहां भी संपत्ति मिलेगी, वहां उसकी कुर्की की कार्रवाई भी की जा सकती है।

शासन तक पहुंचा मामला
बैंक की टीम ने पुरानी फाइलों को फिर से पलट कर रिपोर्ट राज्य मुख्यालय को भेज दी है। सूत्रों के अनुसार, मौलाना का मामला शासन स्तर तक पहुंच चुका है और बैंक ने वसूली की प्रक्रिया को प्राथमिकता में रखा है। बदायूं और बरेली दोनों जिलों के राजस्व व पुलिस प्रशासन को भी इसमें सहयोग के निर्देश दिए गए हैं।
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जानिए पूरा मामला
1990: मौलाना तौकीर रजा ने लिया 5,560 रुपये का कृषि कर्ज़।
1996: सरकार ने की कर्जमाफी, लेकिन इन्हें लाभ नहीं मिला।
1997: बैंक जांच में कर्ज बकाया पाया गया।
2025: ब्याज सहित रकम 28,386 रुपये तक पहुची।
अब बरेली स्थित घर पर वसूली नोटिस चस्पा हुई।

मौलाना तौकीर रजा के प्रकरण में संबंधित बैंक के स्तर से कार्रवाई चल रही है। यदि जरूरत पड़ी तो प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई होगी। -अवनीश कुमार राय, जिलाधिकारी
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