खरदूषण की मौत का समाचार सुन विचलित हो उठा रावण। संवाद
दबतोरी। गांव में चल रही रामलीला में खर-दूषण का वध और सूर्पणखा का रावण से मिलने का मंचन किया गया है। रावण सीताहरण की व्यूह रचना करता है और अपने मामा मारीच का सहयोग मांगता है। मामा मारीच स्वर्ण मृग बनकर सीता को लुभाता है और राम उसका आखेट करने को निकलते हैं। बाद में जब मारीच मारा जाता है तो राम की आवाज में कराहता है। लक्ष्मण रेखा खींच कर मौके पर पहुंचते हैं और पर्दा गिर जाता है।
36वें रामलीला महोत्सव में छठवें दिन स्थानीय कलाकारों ने आदर्श रामलीला क्लब के डायरेक्टर सतेंद्र पाल सिंह एडवोकेट के कुशल निर्देशन में आकर्षक मंचन कर दर्शकों का मन मोह लिया। राम से जुड़ी दो कथाओं पर मंचन किया गया। इसमें कौआ जयंत और खर-दूषण कि वध दिखाया गया। सूर्पणखा अपने भाई रावण के पास खर-दूषण की मौत का समाचार लेकर पहुंचती है तो रावण विचलित हो हो जाता है। सीता हरण की योजना बनाता है और मामा मारीच का सहयोग लेता है।
मामा मारीच स्वर्ण मृग बनता है और राम और लक्ष्मण को अपने जाल में फंसा लेता है। लक्ष्मण रेखा खींचकर सीता को अकेला ही छोड़ जाते हैं। इससे पूर्व की लीला में दिखाया जाता है कि एक कागा सीता के पैरों में चोंच मार कर उड़ जाता है। जिससे रक्त प्रवाह होता है। यह कागा कोई ओर नहीं इंद्र का पुत्र जयंत होता है। भगवान की परीक्षा लेने के लिए आया था। राम ने कागा पर तीर चला दिया। कागा जिधर जाता के तीर पीछा करते हुए उधर की चला जाता। वह सभी लोक घूमा तीर ने पीछा नहीं छोड़ा आखिर में वह ब्रह्मलोक गया तो ब्रह्माजी ने श्री राम के शरण में ही जाने की सलाह दी। राम ने उसकी एक आंख फोड़कर उसके प्राण बख्श दिए।