बदायूं। सामूहिक दुष्कर्म और हत्याकांड में निलंबित इंस्पेक्टर व दरोगा के खिलाफ एक और बड़ी कार्रवाई हो सकती है। उन्हें बर्खास्त भी किया जा सकता है। फिलहाल इस मामले की जांच चलने तक उन्हें चार्ज नहीं दिया जाएगा। तब तक उनके निलंबित रहने का कयास लगाया जा रहा है। विभाग के सूत्रों के अनुसार ये कार्रवाई चार्जशीट दाखिल होने के बाद हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह खुद में एक बड़ी कार्रवाई होगी।
इस मामले में निलंबित इंस्पेक्टर राघवेंद्र प्रताप सिंह की शुरुआत से ही लापरवाही रही। इसकी पुष्टि पुलिस अधिकारी भी कर चुके हैं। उनकी महिला के परिवार वालों से बात हुई थी। जब परिवारवाले थाने पहुंचे थे, तब इंस्पेक्टर थाने में मौजूद थे। उस दौरान दिवस अधिकारी भी मौजूद थे। चूंकि इंस्पेक्टर राघवेंद्र प्रताप सिंह खुद थाने में थे। इसलिए दिवस अधिकारी ने हस्तक्षेप नहीं किया। इंस्पेक्टर स्वयं परिवार वालों से बात करते रहे।
सूत्रों की माने तो इंस्पेक्टर को सूचना मिल चुकी थी कि महिला कुएं में गिरी थी। परिवार वाले हत्या व दुष्कर्म का आरोप लगा रहे हैं। इसके बावजूद इंस्पेक्टर ने महिला के परिवार वालों की एक नहीं सुनी। उन्हें थाने से टहला दिया गया। इससे सोमवार दोपहर तक गांव में पुलिस नहीं पहुंची। जब परिवार वालों ने यूपी 112 पुलिस को सूचना दी, तब महिला का पोस्टमार्टम कराना थाना पुलिस की मजबूरी बन गया। इसके बावजूद इंस्पेक्टर गांव नहीं पहुंचे। उन्होंने हलका इंचार्ज अमरजीत सिंह को अपने पास बुला लिया था। मौके पर अन्य दरोगा व सिपाहियों को भेजा गया था।
इससे पुलिस अधिकारियों की नजर में थाना प्रभारी की लापरवाही पहले ही उजागर हो गई। घटना के तीसरे दिन उन्हें निलंबित कर दिया गया। आठ जनवरी को हलका इंचार्ज निलंबित किया गया, लेकिन उनके ऊपर अब और बड़ी गाज गिरने वाली है। हालांकि पुलिस के उच्चाधिकारी अभी कुछ कहने को तैयार नहीं हैं, लेकिन विभागीय सूत्रों के अनुसार इंस्पेक्टर और दरोगा को बर्खास्त भी किया जा सकता है। अभी उनका निलंबन ही वापस नहीं होगा। इस केस की चार्जशीट दाखिल होने पर उन पर बर्खास्तगी की गाज गिर सकती है।
एफआईआर दर्ज करने के मूड में नहीं थे इंस्पेक्टर
निलंबित इंस्पेक्टर राघवेंद्र प्रताप सिंह लापरवाही तो उजागर हुई ही है। साथ ही एक और बात पता चली है कि इंस्पेक्टर परिवार वालों की तहरीर पर एफआईआर दर्ज करने के मूड में नहीं थे। वह परिवार वालों को टहलाना चाह रहे थे। अनुमान है कि वह परिवार वालों को डांटकर चुप कराना चाह रहे थे। जिससे ये मामला वहीं का वहीं शांत हो जाए और उन्हें एफआईआर दर्ज न करना पड़े। कुछ हद तक वह कामयाब भी हो गए थे, लेकिन दूसरे दिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उनकी मंशा पर पानी फेर दिया बल्कि उन्हें ही ले डूबी।
लोजद का प्रतिनिधिमंडल मिला पीड़ित परिवार से
बदायूं। लोकतांत्रिक जनता दल की ओर से गठित जांच कमेटी के वरिष्ठ नेता एस कुमार के नेतृत्व में जांच कमेटी सदस्य प्रदेश प्रभारी संतोष यादव, किसान प्रकोष्ठ अध्यक्ष ओमपाल सिंह, आदिवासी दलित पिछड़ा प्रकोष्ठ अध्यक्ष नंदकिशोर सिंह पाल व कार्यवाहक अध्यक्ष सत्यपाल सिंह पीड़ित परिवार से मिले तथा हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। इस मौके पर डीपी माथुर, विकास दिवाकर, रविंद्र यादव, मुसाफिर खान, तेजपाल सिंह, रामकिशोर आदि भी साथ रहे।