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बारिश ने किसानों के अरमानों को धो डाला

Mon, 02 Mar 2015 11:15 PM IST
बदायूं।
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दूसरे दिन भी मौसम के मिजाज बिगड़े रहे। एकदम बदले मौसम में पारा लुढ़ककर चार से छह डिग्री सेल्सियस नीचे आ गया है। एक बार ठंड फिर लौट आई। तापमान में एक साथ उतार हो जाने के कारण लोग सर्दी-जुकाम और बुखार आदि बीमारियों से ग्रसित हो गए हैं। गांव में कीचड़ और शहरों में जलभराव से लोग परेशान हो उठे। फसलों की बर्बादी देख किसानों का बड़ा धक्का लगा है। गेहूं, लाही, आलू, तंबाकू आदि फसलों को भारी नुकसान होने का अनुमान है।   
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सोमवार को सुबह से ही रुक -रुककर बारिश ने पूरी दिनचर्या बिगाड़ दी। दफ्तर जाने वाले हों या बाजार में प्रतिष्ठान खोलने वाले व्यवसायी सभी अपने काम को विलंब से पहुंच सके। मजदूरों को कोई काम नहीं मिल सका। ठेले-खोमचे वाले और फड़ के दुकानदारों को कोई मौका नहीं लगा। होली के बाजार में रौनक रहने और अधिक दुकानदारी होने के कोई चांस नजर नहीं आए। व्यापारियों को निराशा हाथ लगी। बहुत जरूरी होने पर ही लोग घर से बाहर निकले।

घंटेभर की मूसलाधार बारिश बनी मुसीबत
शहर में मध्याह्न 12 से एक बजे तक बिजली की कड़कड़ाहट के साथ मूसलाधार बारिश होने से शहर में पानी ही पानी हो गया। बाजार में तेज बारिश होने पर लोग शरण लेने को आतुर दिखे। बरसात के मौसम की तरह छाते लगाए और रेनकोट पहले लोगों को देख नहीं लगता था कि ये होली से पहले का मौसम है।
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जलभराव और कीचड़ ने बढ़ाई मुसीबत
शहर में पहले की भांति इस बारिश से जलभराव से लोग परेशान हो उठे। बाइकों, रिक्शों या अन्य वाहनों से ही लोग जलभराव वाले रोड पार कर सके। पैदल निकलना तो इन मार्गों से बेहद दूभर रहा। नई सराय, ब्राह्मपुर, शहबाजपुर, टिकटगंज चौराहा आदि स्थानों पर जलभराव से लोग परेशान हो उठे। रोडवेज बस अड्डा के अंदर तो तालाब बन गया। प्राइवेट बस अड्डा मार्ग पर दलदली राह से यात्रियों को गुजरना बेहद परेशानी में डालने वाला रहा। एसएसपी आवास में भी जलभराव हो गया।  

किधर के भी नहीं रहे किसान
पहले सूखा ने किसानों की कमर तोड़ दी तो इस बार बेमौसम बरसात ने उनके लिए दोहरी मुसीबत खड़ी कर दी है। सूखा क्षेत्र घोषित जिले के किसानों को अभी तक राहत नहीं मिली है, लेकिन हाली फसल नुकसान को भी जिलाधिकारी ने सर्वे कराने को कहा है। सूखे को केंद्र द्वारा राहत राशि न मिल पाने की बात कहकर किसानों अभी कोई सहायता नहीं मिली है। जिला प्रशासन द्वारा इस बार भी राहत का आश्वासन मिल रहा है।

पहले दिन की बारिश का रिकार्ड
जिले में औसत बारिश      8.5 एमएम
बदायूं में                     9.0 एमएम
बिसौली में                   8.0 एमएम
सहसवान में                  7.0 एमएम
दातागंज में                  10.0 एमएम

गेहूं की फसल गिरी, आलू के खेतों में भरा पानी
बिसौली। गेहूं की फसल गिर गई। आलू के खेतों में पानी भरने से आलू सड़ने की स्थिति हो गई। किसान आंसू बहा रहा है। कई खेतों में तो आलू खुदा पड़ा है। तेज बारिश के कारण इन खेतों में पानी भर गया है। पिछले कई सालों से मंदी की मार झेल रहे किसान को मौसम की इस मार ने तो बेदम कर दिया है।
यहां हाईवे पर जूनियर और प्राइमरी स्कूल परिसर तालाब में तब्दील हो गए।

कुदरत का कहर! धरती पर बिछीं फसलें
बदायूं। शनिवार रात से लगातार हो तेज हवा के झोकों के साथ हो रही बरसात ने अन्नदाता को बेहाल कर दिया है। गेहूं, आलू और सरसों की फसल जमीन पर बिछीं नजर आईं, तो सब्जी की फसलें भी प्रभावित हुई हैं। बेमौसम कुदरत की मार ने किसानों के अरमानों को भी बरसात में बहा दिया। सोमवार दोपहर में बरसात कुछ धीमी पड़ी तो काश्तकार फसलों की हालत देख सकते में पड़ गए। कुदरत के आगे खुद को ठगा महसूस कर रहे किसानों को अब यह भी नहीं सूझ रहा है कि आखिर अब क्या होगा। गेहूं की फसल को साठ फीसदी तक नुकसान का अनुमान है। अगेती गेहूं की फसल तो पूरी तरह बर्बाद हो गई है। पक कर खुदाई को तैयार आलू की फसल पर बरसात ने जमकर चोट की है। सरसों तो खेतों में ही बिछ गई है।
 
हे भगवान, अब तो रहम करो
नरऊ निवासी दिनेश कुमार सिंह कहते हैं कि बरसात ने उसके खेत में सरसों की करीब आठ बीघा फसल को बर्बाद कर दिया। गेहूं भी अब उम्मीद के अनुरूप साथ नहीं दे पाएगा। कुदरत को अब तो रहम कर देना चाहिए।

लागत हासिल करना भी मुश्किल
बमनौसी निवासी काश्तकार सत्यवीर सिंह की मानें तो आलू की फसल पर इस बार काफी लागत आ गई थी। एक तो पहले से रेट काफी कम है, उस पर बरसात के रूप में आई आपदा ने किसानों पर दोहरी मार की है। लागत भी नहीं निकलेगी।

अबकी बार तो खेल ही बिगाड़ दिया
प्रगतिशील किसानों में शामिल बरामालदेव के गिरीशपाल सिंह ने बताया कि होली के आसपास मौसम का मिजाज खेल खराब करता रहा है, लेकिन इस बार तो बरसात के साथ चली हवा ने खेती को चौपट कर दिया है।

नुकसान का मुआवजा दे सरकार
उझानी निवासी आलू उत्पादक गंगासिंह शाक्य ने बताया कि सब्जी फसलों में उसके राजा पर कुदरत ने जिस तरह से कहर बरपाया है, वह काश्तकार सालों साल भूल नहीं पाएंगे। फसलों को नुकसान का आकलन कराके सरकार मुआवजा दिलाए।

इस बार शुरू में मौसम फसलों के अनुरूप रहा था। पिछले दिनों बरसात ने किसानों को ज्यादा फायदा पहुंचाया, लेकिन एक-दो दिन में फसलों की दशा और दिशा ही बिगड़ गई। आलू की फसल में जलभराव से बचाने के लिए किसान पानी के निकास की व्यवस्था कर लें।
-डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक

वजीरगंज में सड़कों पर भरा पानी
वजीरगंज। नाले चोक होने की वजह से बरसात के बाद गंदगी के साथ पानी सड़कों पर भर गया। इससे लोगों को निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ा। लोगों में पंचायत प्रशासन के खिलाफ  रोष है। लोगों का कहना सफ ाई कर्मियों की लापरवाही और पंचायत प्रशासन की अनदेखी की वजह से कस्बेे के अधिकतर नाले बंद पडे़ हैं। बीते दो दिनों हो रही बरसात के कारण कीचड़ सड़कों पर जमा हो गई है। दुकानदारों का कहना है कि पंचायत प्रशासन नालों की समय रहते सफ ाई कराता रहे, तो हल्की बारिश में लोगों को होने वाली मुश्लिों से निजात मिल सके।

त्योहार की खुशियां हुईं फीकी
सैदपुर। दो दिनों से हो रही बारिश ने किसानों को हानि पहुंचाई है। गेहूं तथा आलू की फसल को तो चौपट कर दिया है। इससे होली की खुशियां फ ीकी दिखाई दे रही हैं। व्यापारी वर्ग का कहना है कि इससे त्योहार पर होने वाली खरीदारी पर असर पड़ा है। यदि ऐसा ही मौसम रहा तो साल तो त्योहार फीका जाएगा।

जलभराव से लोगों को आवागमन में दिक्कत
बदायूं/उझानी। शनिवार की रात से रुक-रुक शुरू हुई बारिश सोमवार को भी थमी नहीं। बारिश के कारण तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। पिछले दिनों 24 तक पहुंचा पारा लुढ़ककर 17 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। वहीं लगातार बारिश होने से नाले और नालियां उफना गए। निचले इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गईं। इस कारण लोगों को आवागमन में भी परेशानी का सामना करना पडा। सर्द हवाएं चलने से लोग जहां फिर गर्म कपड़ों में दुबके नजर आए वहीं गेहूं और सरसों की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा दातागंज में अफीम की फसल भी पूरी तरह चौपट हो गई है।

जनजीवन प्रभावित
उझानी। बारिश से ने बिल्सी रोड बाजार सबसे अधिक प्रभावित हुई। पहले से खस्ताहाल सड़क पर गड्डों में भरे बरसाती पानी से आवागमन में लोगों को खासी परेशानी हुई। इसके अलावा गद्दीटोला से साहूकारा, बाजारकलां और नझियाई होकर नगला इलाके तक मुख्य नाला बरसाती पानी की वजह से उफान पर रहा। नाले का पानी बुर्रा रोड के खेतों में भरने से गेहूं और आलू की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। लिंक रोड मोड से स्टेशन रोड तक सड़क किनारे पानी भरा है। डॉ. पीके गोयल ने बताया कि जलभराव रविवार से दूसरे दिन भी बरकरार है।

बेमौसम हुई बरसात से अफीम की खेती चौपट
दातागंज। बेमौसम बरसात और तेज हवा से अफीम की फसल पूरी तरह से चौपट हो गई है। अकाई को तैयार अफीम की फसल खेतों में बिछ गई है। काश्तकारों ने जिला अफीम अधिकारी को फसल नष्ट होने की सूचना दी है।
क्षेत्र में सेरहा और बछलिया दो गांवों में अफीम की पैदावार को लाइसेंस जारी किए गए हैं। 135 दिनों में तैयार होने वाली फसल में अफीम निकलने को तैयार थी। सेरहा के अफीम नंबरदार अनीस खां ने बताया कि होली के बाद बोड़ा अफीम के फल में चीरा लगाकर अकाई शुरू करने वाले थे, लेकिन पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश और तेज हवा से अफीम की फसल खेतों में बिछ गई है। 30-40 प्रतिशत पौधे तो जड़ से ही अकड़ गए हैं। नंबरदार के मुताबिक अफीम के पौधे की जड़ वैसे ही कमजोर होती और बोड़ा आने के बाद पौधे का ऊपरी भाग वजनदार हो जाता है इसलिए हवा चलने पर जड़ पौधे का भार सहन नहीं कर पाती है। एक-एक काश्तकार को 15 से 20 ऐरी की काश्त करने का अफीम विभाग से लाइसेंस जारी हुआ है। बछलिया गांव में कुल आठ काश्तकारों ने एक सौ बीस ऐरी और सेरहा में 14 काश्तकारोें ने ढाई सौ ऐरी अफीम की काश्त की है। अफीम की फसल तैयार करने में 25 से 30 हजार रुपये प्रति काश्तकार को लागत लगानी पड़ती है।

किसान लिखित शिकायत करते हैं तो विभागीय अधिकारी अपने सामने अफीम की फसल उजड़वा देंगे। लगातार दो सीजन फसल उजाड़ी जाती है तो संबंधित काश्तकार को अफीम की पैदावार का लाइसेंस समाप्त हो जाएगा। विभाग अपनी शर्तों पर ही लाइसेंस देता है।
-मोहम्मद इस्लाम, अफीम अधिकारी

पिछले साल भी इन्हीं परिस्थितियों में अफीम की फसल चौपट हुई थी। विभागीय अधिकारियों ने अपने सामने फसल उजड़वाई थी। इस बार भी वहीं स्थिति है। काश्तकारों के लिए लाइसेंस बचाना मुश्किल होगा। अब बाराबंकी मुख्यालय बना दिया है। काश्तकार वहीं शिकायत दर्ज कराएंगे।
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- अनीस खां, अफीम नंबरदार।
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