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शासन में अटका गंगाघाट के सुंदरीकरण का प्रस्ताव

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कछला गंगाघाट। - फोटो : BADAUN
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उझानी (बदायूं)। कछला गंगाघाट के सुंदरीकरण का प्रोजेक्ट एक बार फिर शासन की फाइलों में फंसकर रह गया है। वन विभाग की ओर से नमामि गंगे योजना के तहत गंगाघाट के सुंदरीकरण और उसे उत्तराखंड के हरिद्वार की तर्ज पर विकसित करने का जो प्रोजेक्ट तैयार किया, उसमें 51 करोड़ रुपये लागत का अनुमान था। पिछले साल शुरू में स्वीकृति के लिए जो पत्रावली भेजी गई, उसे तकनीकी टीम ने कुछ खामियां बताकर लौटा दिया था। करीब छह महीने पहले तकनीकी खामियां दूर कर फिर डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) भेज दी गई, जो अटक गई है। नई सरकार गठने के साथ प्रस्ताव पास होने की उम्मीद अब बढ़ी है।
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नमामि गंगे योजना से कछला में गंगा किनारे के रेतीले घाटों को हरिद्वार की तरह पक्के बनवाने, हर घाट तक जल के पहुंचाने की व्यवस्था और पार्क से लेकर प्रकाश व्यवस्था समेत कई ऐसे काम कराए जाने के लिए वन विभाग ने पिछले साल ही प्रोजेक्ट बनाकर कार्रवाई शुरू कर दी थी। विभागीय स्तर से विशेषज्ञों की टीम ने गंगाघाट का निरीक्षण किया था। श्रद्धालुओं को लगने लगा कि गंगाघाट का सुंदरीकरण जल्द शुरू हो जाएगा लेकिन तकनीकी खामियां बताकर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने पत्रावली में सुधार की आवश्यकता बताकर लौटा दी। दरअसल, गंगाघाट को पूरी तरह विकसित करने के लिए राजनीतिक स्तर पर ठोस पहल नहीं की गई। फिर भी करीब छह महीने पहले पत्रावली में खामियां दूर कर फिर से डीपीआर भेज दी गई।
डीएम दीपा रंजन ने भी तत्कालीन जलशक्ति मंत्री महेंद्र प्रताप सिंह से इस मामले में पैरवी की थी। उस वक्त चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। आचार संहिता लगी तो डीपीआर अटक गई। जानकार बताते हैं कि राजनीतिक स्तर से ठोस पहल कर दी जाए तो वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से डीपीआर को स्वीकृति मिलने के साथ धनराशि भी अवमुक्त हो सकती है। इसके बाद कछला गंगाघाट भी हरिद्वार की तरह जगमग और खूबसूरत नजर आएगा।
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बता दें कि कछला गंगाघाट पर उत्तर प्रदेश के कई जिलों के अलावा राजस्थान और मध्यप्रदेश से भी खासकर विशेष स्नान पर्वों पर भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
कछला नगर पंचायत प्रशासन भी कर चुका है पहल
उझानी। कछला गंगाघाट के सुंदरीकरण के लिए करीब चार साल पहले नगर पंचायत प्रशासन की ओर से तत्कालीन डीएम के जरिए डीपीआर भेजी थी। जलशक्ति मंत्रालय को आगे की कार्रवाई करनी थी। बाद में यही पता नहीं लग पाया कि डीपीआर किस स्तर पर फंसी पड़ी है। चेयरमैन नरेश यादव बताते हैं कि गंगाघाट को विकसित किए जाने की एक अरसे से मांग उठ रही है। श्रद्धालुओं को सुविधा और सुरक्षा के दृष्टिकोण से पक्के घाट बनने चाहिए। पर्यटक स्थल के रूप में भी कछला को विकसित किया जाए तो इलाके के लोगों को रोजगार भी हासिल होगा। इसके लिए शासन स्तर से धनराशि अवमुक्त होने पर व्यवस्थाएं दुरुस्त की जा सकती हैं।
कछला गंगाघाट के सुंदरीकरण के लिए विभागीय स्तर से जो डीपीआर भेजी गई है, उसे लेकर स्थानीय स्तर की सभी कार्रवाई पहले ही पूरी की जा चुकी हैं। शासन स्तर से मंजूरी के बाद ही नमामि गंगे योजना से धनराशि अवमुक्त होगी। इसे लेकर वह खुद भी विभागीय अफसरों के संपर्क में हूं। उम्मीद है कि जल्द ही सब ठीक हो जाएगा। - अशोक कुमार सिंह, डीएफओ
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