बदायूं। ककराला फलपट्टी में अमरूद के बागान सूख चुके हैं। करीब एक दशक पहले पांच हजार एकड़ में अमरूद के हरे भरे बाग थे, लेकिन नेमाटोड और फ्यूजेरियम स्पेसीज लगने की वजह से पूरी फल पट्टी बर्बाद हो गई है। वैज्ञानिकों ने यहां पर फिर से फलपट्टी करने के लिए चाइनीज अमरूद लगाने की सिफारिश उद्यान विभाग की से की है। निदेशालय स्तर से इस पर कार्रवाई चल रही है। जल्द ही कोई न कोई नतीजा आएगा।
ककराला के अमरूद को प्रदेश में ही नहीं देश में पहचाना जाता था। बागबानी करने वाले फिरोज खां ने बताया कि डेढ़ से दो पौध बचे हैं। फसल अच्छी नहीं आती है। दो साल में पौध सूख जाती है। परवरिश करना कठिन है। 10 साल पहले तक उन्हें 20 हजार रुपये एक बीघा में बच जाता था। अब क्वालिटी नहीं बनती है।
अफजल खां ने बताया कि मिट्टी खराब होने की वजह से पौधे ठीक तरह से बढ़ नहीं पाते हैं। इस वजह से उत्पादन नहीं हो पा रहा। वहीं, ककराला से करीब 200 से 250 ट्रक अमरूद पश्चिम बंगाल, हरियाणा, असम, सिलीगुड़ी, दिल्ली, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में सप्लाई होते थे। इससे किसानों को अच्छा मुनाफा होता था। धीरे-धीरे पेड़ कम होने लगे। उद्यान विभाग ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद दिल्ली के वैज्ञानिकों से ककराला में सर्वे कराया। पाया गया कि पौधों में नेमाटोड और फ्यूजेरियम स्पेसीज बीमारी लग गई है। इस वजह से पेड़ बड़ा नहीं हो पाता है। उन्होंने जांच में यह भी पाया कि अगर चाइनीज अमरूद लगा दिया जाए तो नेमाटोड और फ्यूजेरियम स्पेसीज को खत्म किया जा सकता है। उद्यान विभाग ने यह रिपोर्ट निदेशालय को भेज दी है। वहां से अंतिम निर्णय होना है। अब ककराला में कुछ लोग नींबू और आम लगा रहे हैं।
ककराला की फल पट्टी में नेमाटोड और फ्यूजेरियम स्पेसीज बीमारी लग गई है। चाइनीज अमरूद लगाने से मिट्टी में सुधार होने की संभावना है। वैज्ञानिकों ने इसकी सिफारिश की है। निदेशालय स्तर ने इस प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है।
-सुनील कुमार, जिला उद्यान अधिकारी