सत्ता बदली...नहीं बदला राशन माफिया का नेटवर्क,नेताओं-कोटेदार के गठजोड़ बरकरार
केंद्र और राज्य सरकार गरीब लोगों को सस्ता राशन देने के लिए तरह-तरह की योजनाएं चला रही है पर राशन माफिया के आगे सभी व्यवस्थाएं फेल हैं। हर सरकार में अपनी पैठ बनाकर गरीबों के हक पर डाका डालने वाले राशन माफिया की जड़ें इतनी मजबूत हैं कि वे अपने आगे किसी को टिकने नहीं देते। किसका कार्ड बनना है किसका निरस्त होना, यह सब कोटेदार तय करते हैं। वजह है कि महकमे के कुछ कर्मचारियों से मिलकर वह अपना काम सीधा करा लेते हैं। हालांकि फर्जी राशन कार्डों को पकड़ने के लिए सरकार ने नई योजना चलाई जिसके लिए राशन कार्डों का सत्यापन सरकारी कर्मचारियों के जरिए कराया गया मगर वहां भी यह माफिया कामयाब ही रहे। काबिले गौर है कि जब कोई उपभोक्ता इनसे कुछ कहता है तो यह उसे जान से मारने तक की धमकी दे डालते हैं। साथ ही कह भी देते हैं कि जहां चाहो शिकायत करो उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकते। उन्हें तो नेताओं को खुश करना आता है।
केंद्र में मोदी और यूपी में योगी सरकार बनने के बाद लोगों को ऐसा लग रहा था कि कोई भी भ्रष्ट अब बच नहीं पाएगा। इसके लिए सरकार की ओर से साफ निर्देश भी जारी हुए। बावजूद इसके जिले में कई स्थानों पर आज भी राशन माफिया की तूती बोल रही है। शिकायतें होतीं है पर उन्हें दबा दिया जाता है।
जिले में कुल 235 राशन की सरकारी दुकानें हैं। इनमें से 82 दुकानें निलबिंत हैं। 115 दुकानें अटैचमेंट में चल रहीं हैं। नौ दुकानें नई बढ़ाई गई और 29 दुकानें होईकोर्ट के आदेश होने की वजह से रिक्त चल रही हैं।
विभागीय आंकड़ों को यदि सच मान लिया जाए तो जिले में कुल 494000 राशन कार्ड लाभार्थी हैं। इनमें से 45221 गरीबी रेखा से नीचे अंत्योदय कार्ड और चार लाख 48779 पीएचएच कार्ड धारक हैं। शासन की ओर से कराए गए सत्यापन में जिले में 15178 पीएचएच और 107 अंत्योदय कार्ड धारक अपात्र मिले। इनकी जगह पर नए लाभार्थियों को चिह्नित किया गया है।
जिला पूर्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शासन की ओर से चार लाख 50 हजार कार्ड धारकों के लिए अनाज आ रहा है। जो करीब पांच लाख लोगों को दिया जाता है। यह सब आंकड़ों तक सिमट कर रहा जाता है गरीबों को अनाज नहीं मिल पाता।
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कार्डधारकों को नहीं मिलता है राशन
बदायूं। कई राशन उपभोक्ताओं का कहना है कि कोटेदारों की मनमर्जी के चलते उन्हें कई-कई माह तक राशन नहीं मिलता है। कोटेदार कभी राशन कार्ड में कमी तो कभी अपात्र कह कर उन्हें टरका देते हैं। सवाल करने पर कहते हैं कि वह नेताओं को हर माह इसी बात के रुपये देते हैं। दो दिन पहले राशन न मिलने पर मोहल्ला कबूलपुरा की महिलाओं ने प्रदर्शन कर डीएम से शिकायत भी की थी।
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लाभार्थियों के राशन कार्ड में गलत नाम किए दर्ज
बदायूं। जिले के कई राशन कार्ड लाभार्थी इस बात से परेशान हैं कि फीडिंग में उनका नाम गलत दर्ज कर दिया है जिसकी वजह से कोटेदार उन्हें राशन नहीं दे रहा है। उनका आरोप भी है कि फीडिंग के समय भी कई कोटेदार पूर्ति विभाग में छाये रहे।
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अटैचमेंट का भी है चक्कर
बदायूं। जिले में 115 दुकानों का अटैचमेंट एक गांव से दूसरे गांव में किया गया है। ये राशन माफिया की एक सोची समझी चाल है। ऐसा करने से दूसरे गांव का लाभार्थी उस गांव में राशन लेने के लिए बहुत कम पहुंच पाता है। चूंकि ऐसे में किसी के पास साधन नहीं तो किसी को टाइम नहीं।
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कोटेदार रख लेते हैं कार्ड
बदायूं। कई लाभार्थियों की शिकायत हैं कई कोटेदार तो अपने पास ही कार्ड रख लेते हैं। सो मनमर्जी से ही राशन वस्तुओं का वितरण करते हैं। कोटेदार पात्रों को यह कर टरका देते हैं कि ‘पात्र नहीं हो’ और कुछ को राशन कार्ड न होने की दशा में राशन नहीं दिया जाता है। जबकि पात्र लाभार्थियों का नाम राशन कार्ड लिस्ट में होता है।
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क्या कहते हैं परेशान उपभोक्ता
अलापुर क्षेत्र की रहने वालीं हर देवी ने बताया कि कोटेदार की ओर से कभी राशन नहीं दिया गया है। जब इसकी शिकायत डीएम से की गई तो अब जाकर थोड़ा बहुत राशन मिला है।
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जय देवी का कहना है कि राशन कार्ड की लिस्ट में नाम है इसके बाद भी उसको राशन नहीं दिया जाता है। वह कई बार राशन लेने गई तो उसको वहां से भगा दिया गया।
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ओमवीरी ने बताया कि कभी राशन मिलता है और कभी नहीं। कोटेदार ने राशन कार्ड अपने पास रख लिया और कहा कि राशन कार्ड नहीं है।
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अलापुर के रहने वाले वीरपाल का कहना है कि इस बार वार्ड नंबर आठ का कोटा दूसरे वार्ड में अटैच कर दिया गया है। इसमें भी कोटेदार की मनमानी चलती है।
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वर्जन-
रिक्त दुकानों को भरने के लिए खुली बैठक कराकर चयन किया जा रहा है। लगातार अभियान चल रहा है। कालाबाजारी रोकने के लिए सभी एसडीएम को निर्देश दिया गया है। इस तरह की शिकायतों को गंभीरता से लेकर जांच कर कारवाई करें।
-महेंद्र सिंह, प्रभारी डीएम