राजनीतिक रूप से बेहद सशक्त बदायूं औद्योगिक विकास के मामले में बेहद कमजोर है। इकलौते इंडस्ट्रियल एरिया की 52 में 23 औद्योगिक इकाइयां बंद हो चुकी हैं। जिले में कुल दो उद्योग हैं, मेंथा और कालीन लेकिन वह भी बदहाल स्थिति में पहुंच गए हैं। हालांकि केंद्र की र्स्टाटअप इंडिया से उद्यमियों में कुछ आस जगी है लेकिन यूपी के बजट में उन्हें अखिलेश यादव से भी आस है। उद्यमी मान रहे हैं कि सपा मुखिया मुलायम सिंह के परिवार के धर्मेंद्र यादव का संसदीय क्षेत्र होने के नाते प्रदेश सरकार के बजट में कुछ बेहतर मिलेगा।
औद्योगिक क्षेत्र में कमजोर होने के चलते रोजगार के लिए यहां से पलायन भी हो रहा है। जबकि यहां मेंथा और कालीन का बड़ा कारोबार है। सहसवान और बिल्सी में कालीन का बड़ा कारोबार है, लेकिन सुविधाएं न होने की वजह से यह मजदूरी तक सिमट कर रह गया है। यही हाल मेंथा कारोबार का है। मेंथा कारोबार में बदायूं की धमक विश्व के 70 से ज्यादा देशों में है लेकिन इस कारोबार से जुड़े लोगों के लिए कोई प्रोत्साहनपरक योजना नहीं है। नए कारोबार पर तीन साल तक टैक्स में छूट संबंधी केंद्र सरकार की स्टार्ट-अप इंडिया योजना से उद्यमियों में कुछ आस जगी है। हालांकि, हर बार की तरह इस बार भी उद्यमियों और व्यापारियों को प्रदेश सरकार के बजट से भी उम्मीदें हैं।