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मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने कहा-प्रत्याशी अच्छा हो तो दल मायने नहीं रखता

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बदायूं। चुनावी सीजन शुरू होते ही सियासी तीर चलने लगे हैं। नेताओं के बयानों में ध्रुवीकरण की धार साफ दिखाई दे रही है। विकास के ट्रैक से जाति धर्म के ट्रैक पर आ रही चुनावी एक्सप्रेस के शोर में मुस्लिम वोटरों की खामोशी भी चौंका रही है। हमने इसी सिलसिले में मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवी लोगों से बात की। लब्बोलुआव निकला कि मुस्लिम समाज इस चुनाव में किसी दल या नेता का पिछलग्गू नहीं बनेगा। मुस्लिम वोटर जाति धर्म की जोड़तोड़ वाली बातों और उकसावे की राजनीति से प्रभावित नहीं होगा। मुसलमान उन प्रत्याशियों का साथ देंगे जो उनके सुख दुख में साथी बनेंगे और सहजता से उपलब्ध होंगे। उनके लिए प्रत्याशी बेहतर होने पर कोई दल अछूत नहीं होगा।
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लोगों को लगता है कि मुस्लिम वर्ग एकजुट होकर वोट देता है। मेरे हिसाब से ऐसा बिल्कुल नहीं है। हर चुनाव में मुस्लिम वोट बंटता है जिसकी वजह से अक्सर उन दलों व प्रत्याशियों को भी फायदा होता है जिन्हें मुस्लिम वोटर पसंद नहीं करते। इस चुनाव में भी कोई चमत्कार नहीं होने जा रहा। मुस्लिम समाज के लोग अपने फायदे नुकसान और निजी जुड़ाव देखते हुए प्रत्याशियों को वोट करेंगे। उनके लिए कोई दल या प्रत्याशी अछूत नहीं है।
- इशाक तबीब, साहित्यकार
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लोग एक विशेष पार्टी को मुस्लिम वोटरों की पहली पसंद मानते हैं। मैं भी काफी हद तक इस बात पर यकीन करता हूं कि काफी संख्या में मुस्लिम वर्ग उसी पार्टी को वोट करता है पर सभी मुस्लिम ऐसा करें, ये असंभव है। मौजूदा परिदृश्य में राजनीति और लोगों का मिजाज काफी बदला है। मुस्लिम समाज के लोगों की अपनी परेशानियां और मुद्दे हैं। उन्हें जिस दल या प्रत्याशी को वोट करना है वे करेंगे। मेरे हिसाब से जिले भर के मुस्लिम वोट अपने क्षेत्र व स्थिति के हिसाब से किसी भी दल या प्रत्याशी को वोट कर सकते हैं।
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- डॉ. यूसुफ, सीनियर फिजियोथेरेपिस्ट
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मुस्लिम वर्ग को सम्मान चाहिए। हर सरकार में उन्हें अपनी बुनियादी समस्याओं को दूर करने वाले नेताओं से उम्मीद होती है पर पूरा समाधान कभी न हो सका। कई बार नेता दूसरे दलों के बहाने डराकर भी इस वर्ग का वोट हासिल करते रहे हैं पर मेरा मानना है कि मुस्लिम वर्ग अब पहले की अपेक्षा कहीं ज्यादा जागरूक और समझदार हुआ है। वह जानता हैं कि चुनावी वक्त पर चलने वाले जुबानी तीर केवल लोगों को भावुक कर वोट लेने के काम आते हैं। कोई भी सरकार आए, वह देश के एक बड़े तबके के साथ अन्याय नहीं कर सकते।
- खिजर अहमद, पूर्व प्रधानाचार्य इस्लामिया इंटर कॉलेज
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मेरे हिसाब से मुस्लिम वर्ग चाहता है कि वह सुरक्षित रहे। इज्जत से जीने का हक मिले। बाकी बात रही मुस्लिम वर्ग की बुनियादी जरूरतों की तो हर सरकार उसके लिए काम करती रही है। गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी इस वर्ग के बड़े मुद्दे हैं। इनका पूरा समाधान होने की गुंजाइश तो दूर तक नजर नहीं आती। इसलिए मुसलमान अब अच्छे प्रत्याशियों को ही वोट करेंगे जो उनके करीब हो और आड़े वक्त उनकी बात सुन ले। जाति धर्म का फैक्टर नहीं चलने वाला।
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- सलीमुद्दीन, वरिष्ठ अधिवक्ता
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