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एमएलसी चुनाव : पहले दिन दो उम्मीदवारों ने खरीदे पर्चे

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कलक्ट्रेट गेट पर तैनात पुलिस। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। विधानसभा चुनाव के साथ-साथ अब एमएलसी चुनाव को लेकर प्रशासन ने अपनी तरफ से तैयारी पूरी कर ली हैं। शुक्रवार से पर्चों की बिक्री और नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई। पहले दिन सुशील कुमार सिंह समेत दो उम्मीदवारों ने पर्चा खरीदा। सुशील ने खुद को भाजपा से दावेदार बताया है।
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बदायूं में विधान परिषद सदस्य की सीट पिछले पांच साल से खाली चल रही है। एमएलसी सीट पर चुनाव के लिए प्रक्रिया चार फरवरी से शुरू हो गई है। निर्वाचन की अधिसूचना जारी होने के साथ ही पर्चा खरीद भी होने लगी है। पहले दिन सुशील कुमार सिंह और सुदीप कुमार चौहान ने पर्चा खरीदा। पर्चा लेते समय सुशील ने खुद को भाजपा उम्मीदवार के रूप में रिकार्ड में दर्ज कराया। सुशील कुमार उझानी क्षेत्र के भाजपा से जुड़े नेता हैं जो क्षत्रिय समाज के संगठनों से भी जुड़े हैं। हालांकि भाजपा जिला इकाई के पास अब तक एमएलसी सीट पर किसी की दावेदारी से जुड़ा नाम हाईकमान ने नहीं भेजा है।
जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि सुशील कुमार सिंह एक आवेदन जरूर दे गए हैं पर इस तरह के निर्णय हाईकमान से ही होते हैं। दूसरे दावेदार सुदीप ने खुद को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लिखापढ़ी कराकर पर्चा खरीदा।
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तीन मार्च को होगी मतगणना
उम्मीदवार 11 फरवरी तक नामांकन पत्रों को खरीद सकते हैं। साथ ही उनको जमा भी कर सकते हैं। नामांकन पत्रों की जांच 14 फरवरी को होगी और नाम वापसी की अंतिम तिथि 16 फरवरी रहेगी। जबकि मतदान तीन मार्च और मतगणना 12 मार्च को होगी।
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राजीव, पूनम, राजेश, जितेंद्र, रामसेवक व धीरज के नाम चर्चा में
वधानसभा चुनाव में टिकट न मिल पाने के कारण भाजपा के कई नेता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। इस बीच एमएलसी पद पर चुनाव प्रक्रिया शुरू होने पर हवा में फिर कई नाम तैरने लगे हैं। बताते हैं कि शहर सीट से प्रबल प्रत्याशी रहे जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम यादव, पहले एमएलसी रह चुके जितेंद्र यादव, भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश यादव, समरेर ब्लॉक प्रमुख के पति धीरज सक्सेना व किसान मोर्चा के नेता हरिओम पाराशरी के नाम फिलहाल चर्चा में हैं। हालांकि पार्टी किसी नए व्यक्ति को प्रत्याशी बनाकर चौंका भी सकती है। चूंकि इस चुनाव को सत्तापक्ष की पार्टी से प्रभावित माना जाता है इसलिए सपा व अन्य दलों में अभी कोई नाम चर्चा में नहीं है। संवाद
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